जो इंडिया / मुंबई: (Elphinstone Bridge Demolition)
ब्रिटिश काल से खड़ा एल्फिंस्टन ब्रिज (Elphinstone Bridge) अब इतिहास बनने से पहले ही विवादों में फंस गया है। इस पुराने पुल के ध्वस्तीकरण का काम विभिन्न सरकारी यंत्रणाओं के मतभेदों के कारण अधर में लटक गया है। पश्चिम रेलवे और मध्य रेलवे के बीच शुल्क को लेकर खींचतान चल रही है, जिससे परियोजना पर ब्रेक लग गया है और इसका सीधा असर नागरिकों व वाहन चालकों पर पड़ने वाला है।
जानकारी के अनुसार, वर्ली-शिवडी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (Worli-Shivdi Elevated Corridor Project) के तहत एल्फिंस्टन ब्रिज को ध्वस्त कर नया डबल-डेकर ब्रिज बनाने की योजना है। इसके लिए महारेल (महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) ने पश्चिम रेलवे को पत्र लिखकर ट्रैक पर ब्लॉक देने की अनुमति मांगी थी। लेकिन पश्चिम रेलवे ने 59.14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मांगी है, जबकि मध्य रेलवे ने 10 करोड़ रुपये ‘वे लीव चार्ज’ के रूप में मांगे हैं।
महारेल ने पश्चिम रेलवे को शुरुआती तौर पर 9 करोड़ रुपये भुगतान किए थे, लेकिन पश्चिम रेलवे ने वह राशि लौटाते हुए अतिरिक्त शुल्क की मांग कर दी है। रेलवे का कहना है कि यह शुल्क राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत कार्गो टर्मिनल के लिए तय मानक के अनुसार है। दूसरी ओर, महारेल का तर्क है कि यह परियोजना पूरी तरह नागरिकों की सुविधा के लिए है, इसमें कोई व्यावसायिक लाभ नहीं है और न ही टोल वसूला जाएगा, ऐसे में इतनी बड़ी राशि मांगना अनुचित है।
एमएमआरडीए द्वारा संचालित वर्ली-शिवडी एलिवेटेड लाइन परियोजना में महारेल के साथ एक समझौते के तहत रेलवे की सीमा के भीतर एल्फिंस्टन और शिवडी में काम चल रहा है। लेकिन अब शुल्क विवाद के चलते एल्फिंस्टन ब्रिज का ध्वस्तीकरण अटक गया है। इससे आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, आवाजाही की दिक्कतें और नागरिकों को लंबे समय तक असुविधा झेलनी पड़ सकती है।
रेलवे और महारेल के बीच इस खींचतान ने एक बार फिर सरकारी तंत्र के आपसी तालमेल पर सवाल खड़ा कर दिया है। अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो मुंबईवासियों को पुराने एल्फिंस्टन ब्रिज के बोझ के साथ और कई महीने गुजारने पड़ सकते हैं।
