कुंभ मेले 2026 शुरू होने से पहले नासिक के तपोवन में साधुग्राम परियोजना पर छिड़ा गंभीर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शहर में हो रही 1800 से अधिक पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय लोग, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और राजनीतिक पार्टियों में भारी आक्रोश होता हुआ नजर आ रहा हैं। इस विवाद बीच अब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फडणवीस सरकार और मनपा प्रशासन की जमकर आलोचना की। प्रेस से बात करते हुए ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि वह साधुग्राम बनाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन तपोवन की पवित्र भूमि पर हजारों पेड़ों की कटाई स्वीकार्य नहीं है। ठाकरे ने कहा, “हम साधुग्राम बनाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन तपोवन में साधुग्राम नहीं चाहते। यह भूमि भगवान रामचंद्र के चरणों के स्पर्श से पवित्र है। यहां हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं—क्या यह विकास है? क्या भविष्य में यहां फिर पेड़ लगाए जाएंगे?”
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछली बार साधुग्राम के लिए दूसरी जगह का उपयोग किया गया था, तो इस बार उसी भूमि का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा?
उद्धव ठाकरे ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “अयोध्या जाकर ‘राम-राम’ करो और नासिक में पेड़ों की कटाई? मुंह में राम और बगल में अडानी! यह विकास नहीं, विनाश है।”
“कुंभ मेले के नाम पर कॉन्ट्रैक्टर को फायदा” — स्थानीय लोगों का आरोप
स्थानीय लोगों का दावा है कि सरकार कुंभ मेले की आड़ में तपोवन की जमीन को ‘डेवलपर्स–कॉन्ट्रैक्टर्स’ के हवाले करने की तैयारी कर रही है। अनेक नागरिकों ने आरोप लगाया कि राम के नाम पर भूमि अधिग्रहण की कवायद चल रही है, जबकि असली उद्देश्य “जमीन पर कब्ज़ा” है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि तपोवन क्षेत्र की हरियाली नासिक की ऑक्सीजन लाइफलाइन है, और इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई भविष्य के लिए खतरनाक होगी।
सरकारी योजनाओं पर भी सवाल
उद्धव ठाकरे ने अपने बयान में संकेत दिया कि सरकार नासिक में वही गलतियां दोहरा रही है, जो पहले संजय गांधी नेशनल पार्क के आसपास कथित अवैध डेवलपमेंट के मामले में देखी गई थीं।
“मुंबई ने भुगता है। अब नासिक का समय आ गया है। यह सिर्फ एक शहर का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे राज्य का है।” — उद्धव ठाकरे
मनपा प्रशासन विवाद में फंसता जा रहा है
इस पूरे विवाद पर मनपा प्रशासन पहले से ही घिरा हुआ है। साधुग्राम निर्माण की तैयारियों और पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर मनपा के जवाब संतोषजनक नहीं माने जा रहे।
तपोवन जैसे इको-सेन्सिटिव एरिया में भारी पेड़ कटाई के आदेश ने प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुंभ 2027 की तैयारियों पर छाया पर्यावरण संकट
कुंभ मेले की भव्यता और साधुग्राम व्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन पर्यावरण पर उसका असर भी उतना ही गंभीर मुद्दा है। नासिक में फिलहाल यही बहस चरम पर है.



