मुंबई । बॉम्बे हाई कोर्ट(Bombay high court
दरअसल, पीड़िता 2016 से आरोपी के साथ रिलेशन में थी। 2018 में महिला ने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली। अक्टूबर 2022 में महिला के पति ने शराब के नशे में उसे बेरहमी से पीटा। उस समय उनका एक बेटा भी था। पति ने बच्चे को भी पीटा। इसके बाद महिला ने अपने पूर्व प्रेमी को फोन कर कहा कि वह उसके घर आना चाहती है। महिला अपने बेटे को लेकर प्रेमी के घर चली गई। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पूर्व प्रेमी ने उससे शादी का वादा किया और फिर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
कुछ हफ्ते बाद आरोपी ने महिला के घर के पास ही एक कमरा किराए पर ले लिया। जब महिला को पता चला कि वह गर्भवती है तो उसने अपने प्रेमी को आपबीती सुनाई। इसके बाद आरोपी ने उसे धमकाना शुरू कर दिया और इस बात से इनकार किया कि यह उसका बच्चा है। पुलिस ने 28 अप्रैल को दुष्कर्म के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
महिला के वकील ने कहा कि गर्भावस्था ने महिला की मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। वह दूसरे बच्चे की देखभाल करने की स्थिति में भी नहीं है। न्यायाधीश ने जेजे अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अवलोकन किया। महिला मानसिक और शारीरिक रूप से अबॉर्शन के लिए फिट बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के 2009 के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक महिला को यह अधिकार है कि वह अपने शरीर और कैसे बच्चे को जन्म देती है, इस बारे में निर्णय ले सकती है।
