पश्चिम रेलवे (Western Railway) के कई प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्टेशन इन दिनों पेयजल संकट (Railway Drinking Water Issue)
स्थिति यह है कि प्लेटफॉर्म पर पानी के लिए भटकते यात्रियों को मजबूरी में महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर स्टेशन के बाहर दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है।
कागज़ों में सुविधा, ज़मीन पर परेशानी
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को सस्ता और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वेंडिंग मशीनें लगाई थीं, लेकिन रखरखाव की अनदेखी ने इस योजना को लगभग निष्क्रिय बना दिया है। रोजाना सफर करने वाले यात्री, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
यात्रियों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्टेशन प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्टेशन पर मौजूद स्टॉल्स में अक्सर सिर्फ बड़ी पानी की बोतलें मिलती हैं और कई बार एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूली जाती है, जिससे यात्रियों में नाराज़गी साफ झलक रही है।
“सूखा स्टेशन” बनते प्लेटफॉर्म
स्टेशनों पर पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा का चालू रहना अनिवार्य है, लेकिन मौजूदा हालात में यह सुविधा लगभग ठप है। इससे यात्रियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। यात्रियों ने रेलवे से तत्काल हस्तक्षेप कर मशीनें चालू कराने की मांग की है।
कब और क्यों शुरू हुई थी योजना?
रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2015 में ‘वॉटर वेंडिंग मशीन पॉलिसी’ लागू की थी। इसके तहत 2015-16 से देश के प्रमुख स्टेशनों पर मशीनें लगाई गईं, ताकि यात्रियों को आरओ से शुद्ध और ठंडा पानी मात्र ₹5 प्रति लीटर की दर से मिल सके।
करोड़ों खर्च, परिणाम न के बराबर?
इस योजना के अंतर्गत आईआरसीटीसी ने देशभर के लगभग 7,500 स्टेशनों पर मशीनें लगाने का लक्ष्य रखा था। जून 2018 तक करीब 1,850 मशीनें स्थापित की जा चुकी थीं।
एक वेंडिंग मशीन की कीमत लगभग ₹3 लाख बताई जाती है। इसके अलावा स्टेशन की श्रेणी के अनुसार ₹2,000 से ₹40,000 तक का वार्षिक लाइसेंस शुल्क भी तय किया गया था।
दिसंबर 2025 की जमीनी हकीकत
वर्तमान में कई स्टेशनों पर मशीनें तकनीकी खराबी, रखरखाव की कमी, या ठेकेदारों द्वारा बिजली बिल व लाइसेंस शुल्क न चुकाने के कारण बंद पड़ी हैं। पहले इन मशीनों का संचालन सिर्फ आईआरसीटीसी के जिम्मे था, लेकिन अब जोनल रेलवे को भी अधिकार दिए गए हैं, ताकि व्यवस्था में तेजी लाई जा सके। इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा।
महंगा पानी, आम यात्री पर मार
वेंडिंग मशीनें बंद होने के कारण यात्रियों को ₹15 से ₹20 की बोतल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये की इस योजना का असली फायदा आखिर किसे मिला—यात्री को या निजी ठेकेदारों को?
पश्चिम रेलवे के स्टेशनों पर पेयजल की यह किल्लत अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर बन चुकी है। यात्रियों की मांग साफ है—वेंडिंग मशीनें तुरंत शुरू की जाएं और जवाबदेही तय की जाए।



