जो इंडिया / मुंबई: (Ladies compartment molestation)
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मुंबई की लोकल ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा एक बार फिर कटघरे में खड़ी हो गई है। आए दिन प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज और भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा मामला करजत से सीएसटी जाने वाली लोकल ट्रेन का है, जहां महिला डिब्बे में बुर्का पहनकर घुसे एक युवक ने यात्रियों को शर्मसार कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ का फायदा उठाकर बुर्काधारी शख्स महिला यात्रियों के साथ अश्लील हरकतें करने लगा और उनके शरीर को गलत तरीके से छूने की कोशिश करता रहा। शुरुआत में बुर्के की वजह से किसी को उस पर शक नहीं हुआ, लेकिन जब उसकी हरकतें लगातार बढ़ती गईं और वह महिलाओं से जरूरत से ज्यादा सटने लगा, तब यात्रियों को संदेह हुआ।
इसी दौरान एक महिला यात्री ने हिम्मत दिखाते हुए बुर्काधारी का नकाब हटाया, तो डिब्बे में मौजूद सभी लोग सन्न रह गए। सामने आया कि बुर्के के अंदर महिला नहीं, बल्कि एक युवक था। इसके बाद महिला डिब्बे में हंगामा मच गया। यात्रियों ने उसे घेर लिया और कुछ महिलाओं ने मोबाइल फोन से उसकी तस्वीरें लेने की कोशिश की।
हालांकि, ट्रेन जैसे ही घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर पहुंची, आरोपी शोर-शराबे का फायदा उठाकर चलती ट्रेन से कूद गया और मौके से फरार हो गया। यात्रियों ने प्लेटफॉर्म पर मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन उस समय कोई रेलवे पुलिस कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिसका लाभ उठाकर आरोपी भागने में सफल रहा।
इस मामले में कुर्ला रेलवे पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संभाजी यादव ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) द्वारा मामले की जांच की जा रही है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है और जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।
गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। पिछले महीने अंबेवली रेलवे स्टेशन पर भी एक लुटेरे ने बुर्का पहनकर महिला यात्री की सोने की चेन छीन ली थी और फरार हो गया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने महिलाओं के मन में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।
रेलवे पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लोकल ट्रेनों और स्टेशनों पर जितने सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है, उतनी संख्या में तैनाती नहीं है। नई भर्तियों में रेलवे प्रशासन की सुस्ती साफ नजर आ रही है। खासतौर पर महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बेहद कम है, जिससे महिला यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और कमजोर पड़ जाती है।
मुंबई लोकल को शहर की लाइफलाइन कहा जाता है, लेकिन अगर इसी लाइफलाइन में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस न करें, तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन और पुलिस इस तरह की घटनाओं पर कब तक ठोस कदम उठाती है।
