जो इंडिया / मुंबई: (Spine Health Awareness)
देशभर में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। खासकर नई माताओं और युवाओं में यह समस्या अब “साइलेंट किलर” बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग में रीढ़ और पीठ दर्द के मामले बीते कुछ वर्षों में दोगुने हो गए हैं।
नई माताओं में बढ़ता दर्द का संकट
वर्ल्ड स्पाइन डे के मौके पर जारी ताज़ा रिपोर्ट ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है — लगभग 60% नई माताएं प्रसव के बाद गंभीर पीठ दर्द की शिकार हो रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना, हार्मोनल बदलाव और शरीर की मुद्रा (पोश्चर) में असंतुलन, रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
जायनोवा शाल्बी अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. विश्वनाथन अय्यर के अनुसार,
> “प्रसव के बाद लगातार बच्चे को गोद में उठाना, झुककर स्तनपान कराना और आराम की कमी, पीठ की हड्डी पर भारी दबाव डालती है। यह सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि यह आने वाले समय में स्थायी विकलांगता का संकेत हो सकता है।”
डॉ. अय्यर ने नई माताओं को सलाह दी है कि वे बार-बार झुकने से बचें, सपोर्टिव कुर्सियों का प्रयोग करें, वजन नियंत्रित रखें और पर्याप्त आराम व फिजियोथेरपी को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
युवाओं में ‘टेक्स्ट नेक’ का प्रकोप
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के स्पाइन सर्जन डॉ. सिद्धार्थ कातकडे बताते हैं कि अब रीढ़ की समस्या बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है।
> “25 से 45 साल के युवाओं में टेक्स्ट नेक, पीठ दर्द और पोश्चर डिस्टॉर्शन के मामले विस्फोटक दर से बढ़े हैं।”
लैपटॉप और मोबाइल पर घंटों झुककर बैठना, लगातार स्क्रीन देखना और शारीरिक गतिविधि की कमी — ये सभी रीढ़ के लिए जहर बन रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप गर्दन में जकड़न, हाथ-पैरों में झनझनाहट, कमजोरी और मोटापा बढ़ रहा है।
साइलेंट किलर बनती जा रही बीमारी
45 वर्ष से कम उम्र के 10 में से 6 लोगों को गर्दन की जकड़न और लचीलेपन की कमी की शिकायत होती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि रीढ़ की बीमारी धीरे-धीरे शरीर की स्थायी कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो आने वाले कुछ वर्षों में रीढ़ से जुड़ी बीमारियां भारत में अपंगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन सकती हैं।
रीढ़ की सुरक्षा के उपाय
सही पोश्चर में बैठें और उठें
हर 30 मिनट में शरीर को स्ट्रेच करें
वजन नियंत्रित रखें
प्रसव के बाद नियमित फिजियोथेरपी कराएं
मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग सीमित करें
पर्याप्त नींद और आराम लें
नई माताओं और युवाओं दोनों के लिए यह चेतावनी है — रीढ़ की हड्डी को हल्के में लेना अब खतरनाक हो चुका है।
आज की अनदेखी, कल का स्थायी दर्द बन सकती है।



