मुंबई की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) नेता और महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने बीएमसी की इम्प्रूवमेंट कमिटी पर ऐसा हमला बोला है, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। आदित्य ठाकरे ने सीधे आरोप लगाया है कि मुंबई का “खून” और शहर की बची हुई खुली ज़मीनें अब बेचने की तैयारी हो रही है। उनका निशाना सिर्फ शिंदे गुट पर नहीं, बल्कि बीजेपी पर भी है। उन्होंने साफ कहा कि अब देखना होगा कि बीजेपी भी इस “संगठित लूट” में शामिल होती है या नहीं।
🚨 The Improvement Committee of the @mybmc has decided to sell off Mumbai’s blood and open spaces. 🚨
While the chairperson belongs to Fakenath Mindhe’s gang, it will be clear tomorrow if the bjp is hand in glove with this organised loot of our dear city.
1) Blood Bank to be…
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) May 26, 2026
आदित्य ठाकरे ने सबसे बड़ा मुद्दा बीएमसी के ब्लड बैंकों के निजीकरण का उठाया। उनका कहना है कि मुंबई में वर्षों से सरकारी निगरानी में चल रहे ब्लड बैंक गरीबों और ज़रूरतमंदों को मुफ़्त खून उपलब्ध कराते रहे हैं। लेकिन अब इन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है, जिसके बाद लोगों से 1100 रुपये तक वसूले जा सकते हैं। ठाकरे ने सवाल उठाया कि आखिर मुंबई के लोगों के “खून” को कारोबार बनाने की इजाज़त क्यों दी जा रही है?
दूसरा बड़ा आरोप बांद्रा वेस्ट के मशहूर खेल मैदान को लेकर लगाया गया। आदित्य ठाकरे का दावा है कि हज़ारों फुटबॉल खिलाड़ियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मैदान को अब एग्ज़िबिशन और कन्वेंशन सेंटर में बदला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसी तरह खुले मैदान खत्म होते गए, तो बांद्रा में रहना मुश्किल हो जाएगा। ट्रैफिक, अस्पतालों पर दबाव, सड़क घोटाले और समुद्र किनारे कथित अवैध निर्माणों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “मुंबई को बेचने की साजिश” बताया।
इतना ही नहीं, ठाकरे ने मालाबार हिल के D-वार्ड में खेल के मैदानों को आवासीय इस्तेमाल में बदलने के फैसले पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि एक उद्योगपति अपने बंगले का विस्तार करना चाहता है और उसके लिए खेल मैदान तक कुर्बान किया जा रहा है।
आदित्य ठाकरे ने साफ चेतावनी दी कि अगर इन मैदानों और सार्वजनिक संपत्तियों को बचाया नहीं गया, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे और हर चेहरे को बेनकाब करेंगे। अब सबकी निगाहें बीएमसी की इम्प्रूवमेंट कमिटी की बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मुंबई की ज़मीन और जनता के अधिकार बचेंगे या सत्ता और पैसों का खेल जीत जाएगा।



