Joindia
नवीमुंबईहेल्थ शिक्षा

Miracle in Ulwe: ग्राइंडर से अलग हुआ पैर दो घंटे की सर्जरी में जुड़ा विश 2 केअर मल्टी स्पेशलिटी, अस्पताल की तत्पर टीम ने गोल्डन ऑवर में रचा जीवनदान का इतिहास

IMG 20260131 WA0018

जो इंडिया /नवी मुंबई / उलवे: (Miracle in Ulwe)

Advertisement

उलवे में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए भीषण हादसे ने कुछ देर के लिए सभी को सन्न कर दिया, लेकिन डॉक्टरों की सूझबूझ और समय पर इलाज ने इस दर्दनाक घटना को उम्मीद की कहानी में बदल दिया। काम के दौरान मजदूर मोहन थापा का पैर अचानक तेज रफ्तार ग्राइंडर मशीन से कटकर अलग हो गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और मजदूर खून से लथपथ हो गया।

IMG 20260131 WA0017
Grinder machine accident

मिनटों में लिया सही फैसला
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सहकर्मियों और स्थानीय लोगों ने बिना देरी किए घायल मजदूर को उलवे स्थित विश 2 केअर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर कुछ मिनट की भी देरी होती तो मरीज की जान और उसका पैर दोनों बचाना मुश्किल हो सकता था।

अस्पताल पहुंचते ही अलर्ट हुई मेडिकल टीम
अस्पताल पहुंचते ही इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। अस्पताल के सीईओ डॉ. शुभम पाठक, वरिष्ठ सर्जन डॉ. महावीर और उनकी विशेषज्ञ टीम ने गोल्डन ऑवर के भीतर इलाज शुरू किया। तुरंत जांच के बाद पैर को जोड़ने की जटिल सर्जरी का निर्णय लिया गया।

दो घंटे की जंग, जिंदगी की जीत
करीब दो घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में डॉक्टरों ने अत्याधुनिक तकनीक और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए कटे हुए पैर को सफलतापूर्वक जोड़ दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है।

सुविधाओं और अनुभव ने बदली किस्मत
डॉ. महावीर ने बताया कि ऐसे मामलों में अस्पताल की आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षित स्टाफ और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता बेहद जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि गोल्डन ऑवर का सही इस्तेमाल ही इस सर्जरी की सफलता की सबसे बड़ी वजह रहा।

उलवे में ट्रॉमा केयर का मजबूत केंद्र
विश 2 केअर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल को उलवे क्षेत्र में ट्रॉमा और इमरजेंसी केयर का मजबूत केंद्र माना जाता है। यहां एक ही जगह पर सभी आवश्यक जांच, ऑपरेशन और पोस्ट-ऑपरेटिव सुविधाएं उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को तुरंत राहत मिलती है।

समय, टीमवर्क और तकनीक ने बचाई जिंदगी
यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि समय पर लिया गया फैसला, आम लोगों की जागरूकता और डॉक्टरों की मेहनत मिलकर असंभव को भी संभव बना सकती है। उलवे में टला यह हादसा न केवल एक मजदूर की जिंदगी बचाने की कहानी है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की ताकत भी दिखाता है।

Related posts

Loneliness case: तीन साल तक अकेलेपन की कैद में सड़ता रहा इंसान: नई मुंबई से दिल दहला देने वाला मामला

Deepak dubey

ठाणे जिले की नदियों को पुनर्जीवित हेतू रोड मेप बनायें ,जिलाधिकारी शिंगारे

Deepak dubey

ड्रोन ट्रेनिग से परेशान कांस्टेबल ने लगाई छलांग, श्रीनगर से ट्रेनिग लेने आया था नवी मुंबई

Deepak dubey

Leave a Comment