जो इंडिया / मुंबई: (Maharashtra–Gujarat border dispute)
महाराष्ट्र–गुजरात सीमा विवाद (Maharashtra–Gujarat border dispute) एक बार फिर गहरा हो गया है। आरोप है कि गुजरात प्रशासन तलासरी तालुका के सीमावर्ती गांवों—वेवजी, गिरगांव, घीमाणिया, झाई, संभा और अच्छाड—में सड़कें, इमारतें और अन्य विकास कार्य कर रहा है, जो कथित तौर पर महाराष्ट्र की सीमा में आते हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि यह सब “सीमा की अस्पष्टता” और “गूगल मैप की गलत जानकारी” के चलते संभव हो पा रहा है।
गूगल मैप पर गलत सीमा—विवाद को मिला नया ईंधन
स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने बताया कि गूगल मैप पर कई मराठी गांवों को गुजरात की सीमा में दिखाया जा रहा है। इसके कारण राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी कागजात और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों में भारी भ्रम पैदा हो गया है। लोगों का कहना है कि तकनीकी प्लेटफॉर्मों पर गलत जानकारी ने जमीन विवाद को और कठिन बना दिया है।
गुजरात द्वारा निर्माण कार्यों पर महाराष्ट्र निवासियों का विरोध
तलासरी तालुका के वेवजी गांव में गुजरात के नागरिकों और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर पक्के निर्माण किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पष्ट सीमा और ढीली प्रशासनिक व्यवस्था के कारण कई अवैध संरचनाएं खड़ी हो चुकी हैं, जिसे लेकर स्थानीयों में रोष बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
संयुक्त पैमाइश पर विवाद—मापन अभियान ठप
सीमा विवाद को शांत करने और स्पष्ट रेखांकन के लिए महाराष्ट्र और गुजरात, दोनों राज्यों के राजस्व विभागों ने मिलकर संयुक्त पैमाइश की शुरुआत की थी। पालघर के तलासरी तहसीलदार और गुजरात के उंबरगांव तहसीलदार की उपस्थिति में मापन कार्य शुरू हुआ। लेकिन स्थानीय नागरिकों और उपसरपंचों की कड़ी आपत्तियों के कारण पैमाइश का यह अभियान बीच में ही रोकना पड़ा।
वेवजी के सर्वे नंबर 204 और सोलसुंभा के सर्वे नंबर 173 पर दोनों राज्यों के दावे होने से यह विवाद और उलझ गया है।
स्थानीयों की नाराज़गी—“वर्षों पुराना विवाद कब सुलझेगा?”
ग्रामवासियों का आरोप है कि सीमा की अस्पष्टता के कारण उनकी भूमि, घरों और अधिकारों पर लगातार संकट बना हुआ है। कर वसूली, जमीन के कागजात, सरकारी योजनाओं की पात्रता और निर्माण अनुमति जैसी प्रक्रियाएं अटक रही हैं। इससे गांवों में विकास कार्य बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
कई ग्रामीणों ने कहा कि सीमा विवाद की आड़ में कुछ तत्व अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रशासन की निष्क्रियता से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। वे चाहते हैं कि सीमा का स्थायी निर्धारण किया जाए ताकि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान निकले।
प्रशासन गंभीर, लेकिन समाधान अब भी दूर
दोनों राज्यों के राजस्व अधिकारियों के बीच इस विवाद पर चर्चा जारी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी मूल्यांकन, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और संयुक्त मापन के आधार पर जल्द ही निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। लेकिन मौके की स्थिति बताती है कि जब तक स्थानीय लोगों का विश्वास नहीं जीता जाएगा, सीमा निर्धारण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी।
ग्रामीणों की स्पष्ट मांग—“सीमा निर्धारण तुरंत किया जाए”
सीमा विवाद के कारण लोगों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस मुद्दे को राजनीतिक या प्रशासनिक टकराव से ऊपर उठाकर तात्कालिक रूप से हल किया जाए, ताकि विकास कार्य और नागरिक अधिकार बाधित न हों।
