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लीव एंड रिलेशन शिप की तरह बनाए जा रहे कानून ,संसद मे धर्माचार्य की जरूरत -कथावाचक देवकीनंदन, सरकार मुक्त हो मंदिर

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नवी मुंबई। देश मे इस समय लीव एंड रिलेशन शिप (Leave and relationship in the country at this time) की तरह कानून (Law) बनाए जा रहे है। जिसके कारण देश मे युवाओ को बर्बादी की तरफ ले जाया जा रहा है। देश की संस्कृति और धर्म (Culture and religion of the country) को बचाए रखने के लिए सरकार के कब्जे मे रखे गए मंदिरों को मुक्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही देश के संसद (Parliament of the country) मे कम से कम 50 से 55 धर्माचार्य भेजे जाने चाहिए। धर्माचार्य शासन (Diocesan rule) पर अंकुश रख सकते है। इसके लिए सनातन बोर्ड का गठन (Formation of Sanatan Board) होने की जरूरत होने की प्रतिक्रिया कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर (Narrator Devkinandan Thakur) ने खारघर मे व्यकत की है।

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खारघर मे चल रहे कथा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर से बातचीत के दौरान कहा कि मथुरा और काशी समेत सभी महत्वपूर्ण मंदिर हमें मिलने चाहिए। अगर हम भगवान कृष्ण और भोलेनाथ के मंदिर नहीं बचा सके तो हमारा सनातन धर्म और कथावाचन व्यर्थ है। जब तक हमारे मंदिर हमें नहीं मिलते, हमारी आत्मा शांत नहीं होगी|उन्होंने यह भी कहा कि अगर दूसरे धर्म के लोग सौहार्द दिखाना चाहते हैं तो उन्हें खुद इन मंदिरों को लौटाने का प्रस्ताव देना चाहिए। इसके साथ ही सरकार को सनातन बोर्ड का घठन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हिन्दू राष्ट्र मे अगर वफ बोर्ड बन सकता है तो सनातन बोर्ड क्यों नहीं बन सकता।

धर्माचार्य रखते थे राजाओ के कार्य पर अंकुश

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अब तक के राजाओ के कार्यकाल पर गौर करेंगे तो धर्मचार्य ही उनके कार्यों पर अंकुश रखते थे। जहा गलत होता था वहा धर्माचार्य उसे सही कराने पर जोर देते थे। ठीक उसी तरह लोकसभा मे 50 से 55 धर्माचार्य भेजे जाने चाहिए। इससे देश को सनातन धर्म को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा। इसके साथ ही हावी हो रहे विदेशी संस्कृति को समाप्त करने मे सफलता मिलेगी।

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