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नियमों की धज्जियां उड़ाकर रोजाना लाखों जानवरों का कत्ल, सड़कों पर हो रहा कत्ल और बिक्री भी अवैध, फूड एंड सेफ्टी नियमों की उड़ रही धज्जिया

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देवनार जैसे लाइसेंसधारी कत्लखानों में भी नहीं होता नियमों का पालन

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मुंबई। देशभर में नियमों को ताक पर रखकर प्रतिदिन लाखों की संख्या में जानवरों का कत्ल किया जाता है। इतना ही नहीं फूड एंड सेफ्टी एक्ट को भी नजरअंदाज किए जाने के कारण मांसाहार लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी राज्यों में एक कमेटी बनाई गई थी, लेकिन अब यह कमेटी सिर्फ नाममात्र की होने के कारण मुंबई हाईकोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था ।इसके बावजूद नियमो की धज्जियां उड़ाई जा रही है।

भारत में बड़े-बड़े लाइसेंसधारी बूचड़खानों और लाखों की तादात में सड़कों पर चिकन, बैल, भैंस, भेड़, बकरा जैसे जानवरों को खाने के लिए काटा जाता है। काटने से पहले प्रिवेंशन आॅफ क्रूएलिटी टू एनिमल्स एक्ट 1960 के अनुसार उन जानवरों को बेहोश करना एवं स्वास्थ्य चेकअप करना बंधनकारक होता है, लेकिन इसका पालन नहीं होने के कारण इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों पर रोक लगाने के लिए स्व.लक्ष्मीनारायण मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में 2013 में पिटीशन फाइल किया था। उसके अनुसार 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने स्लाटर हाउस मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का आदेश दिया था। इस कमेटी में पालिका, प्रदूषण नियंत्रण और एनिमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों को शामिल करने की बात कही थी, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि यह कमेटी सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गई।

खुलेआम हो रही है मांस की बिक्री

प्रिवेंशन आॅफ क्रूएलिटी टू एनिमल्स एक्ट 1960 के अंतर्गत स्लाटर हाउस 2001 के और फूड एंड सेफ्टी नियम के अनुसार स्लाटर हाउस में प्रतिदिन कितनी बार सफाई करना, टेम्प्रेचर मेंटेन करना, हाईजिन कैसा होगा, वॉल्व कैसा होना चाहिए, मांस को प्रिजर्ब करना ताकि ट्रांस्पोर्टेशन में खराब न हो जाए, इन सभी बातों का ध्यान रखना बंधनकारक होता है।

इसके अलावा मांस की बिक्री खुले में नहीं करने का भी नियम है। इसके बावजूद इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम धंधे किए जा रहे हैं। जानवरों को काटने के बाद बचा हुआ अवशेष और रक्त सड़कों पर या पानी में फेंक दिया जाता है, जिससे प्रदूषण फैलता है। इसका असर भारी मात्रा में पर्यावरण एवं लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

मुंबई हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने इस तरह के काम की कड़ी निंदा भी को थी। कोर्ट ने सड़कों पर खुलेआम लटकाकर मांस बिक्री की जाती है, जिसकी दुर्गंध फैलती तथा देखने से दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा इस मांस को खाने वालों को अनेक तरह की बीमारियां भी होती हैं। इससे बचाव के लिए सभी नियमों का सख्ती से पालन एवं इस तरह के काम करने वालों पर कार्रवाई करना जरूरी है। मुंबई हाई कोर्ट की एड सिद्ध विद्या ने बताया कि मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी ने नियमबाह्य तरीके से कत्ल करने वालों को फटकार लगाई थी। उन्होंने गत वर्ष मुबई पालिका के आयुक्त से कमेटी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। इतना ही नहीं यदि निर्धारित समय तक रिपोर्ट पेश नहीं किया गया तो सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी थी ।जिसके बाद रिपोर्ट पेश किया गया था। इसके बाद कोर्ट ने नियमो को सख्ती से पालन करने का ने निर्देश दिया था ।इसके बावजूद नियमो की धज्जियां लगातार उड़ाई जा रही है m

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