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e-commerce fraud case: ई-कॉमर्स कंपनियों को ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ — मुंबई क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

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जो इंडिया/मुंबई। (e-commerce fraud case)

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मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट–8 ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो नामी ई-कॉमर्स कंपनियों को लाखों रुपये का चूना लगा रहा था। यह गिरोह बेहद चालाकी से डिलीवरी पैकेज के बारकोड बदलकर महंगी वस्तुएं अपने पास रखता और सस्ती वस्तुएं वापस भेजकर रिफंड के नाम पर ठगी करता था। पुलिस ने इस गिरोह से करीब ₹45 लाख का माल जब्त किया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

बारकोड की अदलाबदली से होती थी ठगी

क्राइम ब्रांच को गुप्त जानकारी मिली थी कि कुछ लोग डिलीवरी बॉय की मिलीभगत से ठगी कर रहे हैं। यह लोग एक ही समय पर दो ऑर्डर करते — एक सस्ता और एक महंगा। जब डिलीवरी होती, तो वे महंगे प्रोडक्ट के बॉक्स पर लगा बारकोड निकालकर सस्ते प्रोडक्ट के बॉक्स पर चिपका देते और सस्ते वाले का बारकोड महंगे पर लगा देते।

इसके बाद महंगा सामान “न स्वीकारने” का नाटक कर सस्ती वस्तु वापस भेज देते और कंपनी से रिफंड ले लेते। इस तरह गिरोह ने कई कंपनियों से हजारों ऑर्डर में फर्जीवाड़ा किया था।

बोरीवली में जाल बिछाकर पकड़े गए आरोपी

6 अक्टूबर को पुलिस को सूचना मिली कि यह गिरोह बोरीवली (पश्चिम) के चंदावरकर रोड स्थित रिलायंस डिजिटल स्टोर के सामने मिलने वाला है। क्राइम ब्रांच की यूनिट–8 ने मौके पर जाल बिछाया और कार्रवाई की। टीम ने ई-कॉमर्स कंपनी के एक डिलीवरी बॉय समेत तीन आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा, जब वे टेंपो और ह्युंडई क्रेटा कार में माल के बॉक्स पर बारकोड बदल रहे थे।

₹45 लाख का माल जब्त, 13 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत

पुलिस ने घटनास्थल से कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य महंगे सामान बरामद किए। इनकी कुल कीमत लगभग 45 लाख रुपये बताई गई है। सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 अक्टूबर 2025 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लक्ष्मी गौतम, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शैलेश बलकवडे, उपायुक्त (प्रकटीकरण–1) विशाल ठाकुर और सहायक पुलिस आयुक्त (डी–पश्चिम) प्रशांत राजे के मार्गदर्शन में की गई।

टीम में प्रभारी पुलिस निरीक्षक लक्ष्मीकांत सालुंखे, एपीआई रोहन बागडे, तथा पुलिस कर्मचारी पाटील, बराहते, सोनावणे, अतिग्रे, सकत, सताले और काकड़ शामिल थे, जिन्होंने मिलकर यह सफल कार्रवाई अंजाम दी।

ई-कॉमर्स सुरक्षा पर सवाल

इस गिरोह के खुलासे ने ई-कॉमर्स कंपनियों की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारकोड सिस्टम के माध्यम से इतनी बड़ी ठगी यह साबित करती है कि कंपनियों को अपने लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी चैन की सुरक्षा बढ़ाने की ज़रूरत है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्य अभी भी सक्रिय हो सकते हैं और उनकी तलाश जारी है।

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