मुंबई के दिल में बसे नायगांव के BDD चॉल पुनर्विकास प्रोजेक्ट (BDD Chawl Keys Controversy) को लेकर महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता Aaditya Thackeray ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं कि तैयार हो चुके घरों की चाबियां सिर्फ ‘मुहूर्त’ के नाम पर रोकी जा रही हैं, जबकि आम लोग किराए के मकानों में परेशान हो रहे हैं।
आदित्य ठाकरे का कहना है कि मुंबई के इस प्राइम इलाके में बीडीडी चॉल के पुनर्विकास के तहत बनाई गई पहली हाईराइज इमारत पिछले तीन महीनों से पूरी तरह तैयार है और फ्लैट्स का अलॉटमेंट भी हो चुका है, लेकिन सरकार अब तक उद्घाटन की तारीख तय नहीं कर पा रही है। उनका आरोप है कि राजनीतिक कार्यक्रम और फोटो-ऑप के चक्कर में उन परिवारों को उनके घरों की चाबियां नहीं दी जा रही हैं, जो लंबे समय से अपने नए घर में शिफ्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
The Naigaon BDD Chawls work also started off along with Worli and NM Joshi BDD Chawls on 1st August 2021, in presence of the then CM Uddhav Thackeray ji.
The first building has been ready for over 3 months and the government hasn’t found a date for “inauguration” and… pic.twitter.com/1jWEXyVMNV
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) March 12, 2026
उन्होंने याद दिलाया कि 1 अगस्त 2021 को उस समय के मुख्यमंत्री Uddhav Thackeray की मौजूदगी में वर्ली, एन.एम. जोशी मार्ग और नायगांव के BDD चॉल प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ था। अब जब पहली बिल्डिंग तैयार हो चुकी है, तब भी लोगों को घर देने में देरी समझ से परे है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री से इस मुद्दे में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द चाबियां बांटने की अपील की थी, क्योंकि कई परिवार महीनों से किराए के मकानों में रह रहे हैं और अब उन्हें यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे अपना रेंट एग्रीमेंट दोबारा बढ़ाएं या जल्द ही अपने नए घर में शिफ्ट हो पाएंगे।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जैसे ही उन्होंने खुद मौके पर जाकर देरी की वजह जानने की बात कही, तभी “सूत्रों” के हवाले से 16 मार्च को उद्घाटन की खबर सामने आई। आदित्य ठाकरे ने उम्मीद जताई कि यह तारीख सिर्फ घोषणा न रह जाए, बल्कि सच में लोगों को उनके घरों की चाबियां सौंपने का दिन बने।
अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या सरकार सच में 16 मार्च को उद्घाटन कर चाबियां सौंपेगी या फिर यह मामला भी राजनीति और रस्मों के बीच अटक कर रह जाएगा। मुंबई के हजारों परिवारों की नजर अब इसी फैसले पर टिकी है।
