जो इंडिया/मुंबई: (Ganesh Visarjan
मुंबई हाईकोर्ट (Mumbai Highcourt) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि दक्षिण मुंबई के ऐतिहासिक बानगंगा तालाब सहित शहर के किसी भी प्राकृतिक जलस्रोत में गणेश मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाएगा। अदालत ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) द्वारा 26 अगस्त को जारी किए गए दिशानिर्देश “सामाजिक हित और पर्यावरण संरक्षण” को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने मलाबार हिल निवासी संजय शिर्के की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई छूट व्यावहारिक नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना था कि पिछले कई वर्षों से स्थानीय भक्तगण पर्यावरण–अनुकूल गणेश मूर्तियों का विसर्जन बानगंगा तालाब में करते आ रहे हैं और यह धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने दलील दी कि एमपीसीबी द्वारा जारी दिशानिर्देशों से उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
शिर्के ने यह भी कहा कि 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में केवल पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) की मूर्तियों का कृत्रिम तालाबों में विसर्जन अनिवार्य किया था, लेकिन एमपीसीबी ने उस आदेश का विस्तार करते हुए पर्यावरण–अनुकूल मूर्तियों पर भी पाबंदी लगा दी, जो सही नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल बिरेन्द्र साराफ ने तर्क दिया कि एमपीसीबी का उद्देश्य किसी की धार्मिक परंपराओं पर अंकुश लगाना नहीं है, बल्कि प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम तालाबों का निर्माण इसी उद्देश्य से किया गया है ताकि गणेशोत्सव का उत्सव बिना किसी पर्यावरणीय नुकसान के मनाया जा सके।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह माना कि पर्यावरण की रक्षा सर्वोपरि है और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए भी प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। इसलिए अब शहरवासियों को गणेश मूर्तियों का विसर्जन केवल मनपा द्वारा तैयार किए गए कृत्रिम तालाबों में ही करना होगा।
