जो इंडिया/नई दिल्ली। (Delhi Ashram Girls Abuse)
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। स्वामी चैतन्यानंद नामक व्यक्ति पर 32 मासूम और युवतियों के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला समाज में उस काले सच को उजागर करता है, जहां सुरक्षा और आश्रय देने के नाम पर ही दरिंदगी की जा रही है।
यह घटना लोगों को बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की याद दिलाती है। वहां भी 42 लड़कियों में से 34 को यौन शोषण का शिकार बनाया गया था। उस मामले में मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर को अदालत ने दोषी ठहराकर सज़ा सुनाई थी। अब दिल्ली में सामने आया यह नया मामला एक बार फिर से व्यवस्थागत खामियों और सुरक्षा तंत्र पर बड़े सवाल खड़े करता है।
पीड़ित लड़कियों की शिकायत पर पुलिस ने चैतन्यानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पीड़िताओं का कहना है कि उन्हें धर्म, भक्ति और आश्रम जीवन का लालच देकर वहां लाया गया और फिर शोषण का सिलसिला शुरू किया गया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी को उजागर करती है। बार-बार ऐसे मामले सामने आना इस बात का सबूत है कि आश्रय और पुनर्वास केंद्रों में निगरानी और जवाबदेही बेहद कमजोर है।
मुजफ्फरपुर कांड से समानताएं
मुजफ्फरपुर (2018): 42 लड़कियां, 34 पर यौन शोषण साबित, बृजेश ठाकुर को सज़ा।
दिल्ली (2025): 32 लड़कियों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए, आरोपी चैतन्यानंद पर केस दर्ज।
बड़ा सवाल
लगातार दोहराए जा रहे ऐसे मामलों ने आम लोगों के मन में यह भय पैदा कर दिया है कि जिन स्थानों को सुरक्षित पनाहगाह समझा जाता है, वहीं पर मासूमों की जिंदगी बर्बाद हो रही है।
सरकार और प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वह ऐसे आश्रमों और बालगृहों की सख्ती से जांच और निगरानी सुनिश्चित करे, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस तरह की दरिंदगी का शिकार न हों।
