ASHA BHOSLE
सुरों की दुनिया आज एक अजीब खालीपन से गुजर रही है। आशा भोसले की वो आवाज, जिसने दशकों तक हर एहसास को सुर दिया, अब खामोश हो चुकी है और इसी खामोशी के बीच एक अधूरी धुन की कहानी ने भी दिल को और भी भारी कर दिया है। कहा जा रहा है कि आशा ताई एक नए गाने पर काम कर रही थीं, जिसके बोल थे, ‘जाने दो…’ लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था।
इस गाने की सिर्फ चार लाइनें ही रिकॉर्ड करने को बाकी रह गयी थी, लेकिन अब ये गाना कभी पूरा नहीं हो पायेगा। अब वो धुन, वो एहसास हमेशा अधूरा ही रह जाएगा. कहा ज रहा है कि ये एक प्राइवेट एल्बम का गाना था, जिसके कम्पोजर शमीर टंडन हैं. शमीर ने पेज 3, ट्रैफिक सिग्नल, बाल गणेश और कॉर्पोरेट जैसी फिल्मों के लिए गाने दिए हैं। आशा भोसले के निधन पर म्यूजिक कम्पोजर शमीर टंडन ने बताया कि पिछले कुछ दिन से वो आशा ताई के साथ इस गाने पर काम कर रहे थे, जिसके बोल प्रसून जोशी ने लिखे हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ इस गाने की चार लाइनें रह गई थीं, लेकिन उससे पहले यह दुखद खबर आ गई। शमीर टंडन ने बताया कि इस गाने के बोल ‘जाने दो…जाने दो हैं’। आशा ताई ने कुछ दिन पहले रिहर्सल भी की थी, वह हमेशा बहुत ही एक्टिव रहा करती थीं. उनसे मेरी मुलाकात 2003 से है। वाह इस गाने को पूरा करने के लिए स्टूडियो में आनेवाली थीं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सोचिये, एक ऐसी गायिका, जिसने हजारों गाने गाए, जिसकी आवाज हर जज्बात की पहचान बन गई, उसका आखिरी गीत सिर्फ चार लाइनों में ही सिमट कर रह गया।
ये सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि अधूरी कहानी है
ये सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक अधूरी कहानी, एक रुका हुआ एहसास है।
आज भी जब उनके पुराने गीत बजते हैं, तो लगता है जैसे वो यहीं कहीं हैं, मुस्कुराते हुए, सुरों में जादू घोलते हुए। लेकिन ‘जाने दो…’ अब एक ऐसा गीत बन गया है, जो कभी पूरा नहीं होगा और शायद इसी अधूरेपन में उसकी सबसे गहरी खूबसूरती छिपी है। आशा ताई का जाना सिर्फ एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि एक एहसास का खत्म हो जाना है। उनका यह अधूरा गाना हमें हमेशा ये याद दिलाएगा कि कुछ कहानियां पूरी नहीं होतीं फिर भी वो हमेशा दिल के सबसे करीब रहती हैं…!



