जो इंडिया / मुंबई: (Aapla Davakhana Tender Issue)
गाजे-बाजे और बड़ी धूमधाम से शुरू की गई उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की महत्वाकांक्षी “आपला दवाखाना योजना” अब ठाणे में बंद हो गई है। ठाणे महानगरपालिका (टीएमसी) ने इस योजना पर ताला ठोंकते हुए संचालन करने वाली कंपनी का ठेका समाप्त होने का हवाला दिया है। लेकिन ठेका अवधि बढ़ाने के बजाय सीधे योजना को बंद कर देना सवालों के घेरे में है। अब गरीबों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था रामभरोसे हो गई है।
जानकारी के अनुसार, ठाणे मनपा ने 31 जुलाई 2020 को एक अधिनियम जारी कर “आपला दवाखाना योजना” की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ी और गरीब बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयां उपलब्ध कराना था। इस परियोजना का ठेका एम. मेड ऑन गो हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को दिया गया था। योजना के तहत 50 आपला दवाखाने शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वास्तव में 46 क्लिनिक ही शुरू किए गए।
पांच वर्षों से गरीब मरीजों के इलाज में मददगार रही यह योजना अचानक बंद कर दी गई। मनपा प्रशासन का कहना है कि कंपनी का अनुबंध समाप्त हो गया है, इसलिए क्लिनिक बंद कर दिए गए। हालांकि सवाल यह उठता है कि अगर ठेका खत्म हो गया तो उसे बढ़ाया क्यों नहीं गया या किसी नई कंपनी को जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी गई?
इस निर्णय से ठाणे शहर की गरीब जनता की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने लगी है। कई जगहों पर मरीजों को फिर से महंगे निजी क्लिनिकों और दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
इस संदर्भ में स्वास्थ्य उपायुक्त उमेश बिरारी ने बताया कि, “यद्यपि आपला दवाखाना योजना फिलहाल बंद की गई है, लेकिन केंद्र सरकार की शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना के तहत ठाणे में 43 क्लिनिक फिलहाल कार्यरत हैं।” हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि मनपा के पास अभी यह स्पष्ट जवाब नहीं है कि ठाणेकरों की सेवा कर रही “आपला दवाखाना” योजना को अचानक क्यों बंद किया गया।
