जो इंडिया / मुंबई: (Mango juice adulteration)
महाराष्ट्र में मिलावट का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब गर्मियों के सीजन में आम और उससे बने उत्पादों में भी मिलावट का खतरनाक खेल सामने आया है। पुणे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की बड़ी कार्रवाई में 32 टन मिलावटी मैंगो पल्प पकड़ा गया है, जिसे केमिकल्स और नकली रंगों की मदद से तैयार किया जा रहा था। इस खुलासे ने आम लोगों के बीच हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यही पल्प जूस, जैम और आमरस जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होता है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा गोरखधंधा पुणे के मावल और खेड़ क्षेत्र में चल रहा था। छापेमारी के दौरान ‘मे. मोहम्मद एकरामुल उर्फ अक्रम गुलाम’ के ठिकाने से भारी मात्रा में मिलावटी पल्प बरामद किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस पल्प को आकर्षक रंग और स्वाद देने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे यह देखने में असली आम जैसा लगे। कार्रवाई के दौरान करीब 2.23 लाख रुपये का माल भी जब्त किया गया है।
हर घूंट में छिपा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मिलावटी पल्प का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसमें मिलाए जाने वाले केमिकल्स पेट से जुड़ी बीमारियों, एलर्जी, फूड प्वाइजनिंग और लंबे समय में गंभीर रोगों का कारण बन सकते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह उत्पाद बाजार में खुलेआम सप्लाई किए जा रहे थे, जिससे हजारों लोगों की सेहत खतरे में पड़ सकती थी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र में इस तरह का मामला सामने आया हो। इससे पहले मुंबई में भी हजारों लीटर मिलावटी दूध जब्त किया गया था। बावजूद इसके, मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं और वे नए-नए तरीकों से लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बार-बार कार्रवाई के बावजूद इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है।
प्रशासन की सख्ती पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कागजों में सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ छापेमारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन पर सख्त निगरानी जरूरी है।
उपभोक्ताओं में दहशत, भरोसे पर असर
इस घटना के बाद उपभोक्ताओं के बीच डर का माहौल है। लोग अब बाजार में मिलने वाले जूस और आमरस की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। जो चीजें गर्मी में ताजगी और स्वाद के लिए पी जाती थीं, वही अब संदेह के घेरे में आ गई हैं।
क्या करें उपभोक्ता?
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे पैकेज्ड और प्रमाणित ब्रांड के उत्पाद ही खरीदें, खुले में बिकने वाले जूस से बचें और शक होने पर संबंधित विभाग में शिकायत करें। इसके अलावा घर पर बने ताजे जूस को प्राथमिकता देना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।



