जो इंडिया / नई दिल्ली : (Fuel price increase India)
Advertisement
जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि घरेलू बाजार में कीमतों में सीमित बढ़ोतरी के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियों को औसतन 25 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है। वहीं एलपीजी सिलेंडर पर होने वाले नुकसान को जोड़ दिया जाए तो कुल दैनिक घाटा लगभग 1380 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां – Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum – इस समय भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली और सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो इन कंपनियों की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा दबाव Hindustan Petroleum पर देखा जा रहा है। कंपनी को इंटीग्रेटेड आधार पर प्रति बैरल करीब 19 डॉलर का नुकसान हो रहा है। वहीं Indian Oil Corporation को प्रति बैरल लगभग 4 डॉलर और Bharat Petroleum को करीब 8 डॉलर का घाटा सहना पड़ रहा है।
हालांकि हालिया 3 रुपये प्रति लीटर की मूल्य वृद्धि से कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है। अनुमान है कि इससे सालाना घाटे में करीब 34,500 करोड़ रुपये तक की कमी आ सकती है। लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत केवल सीमित समय के लिए है और यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो तेल कंपनियां दोबारा कीमतें बढ़ाने की मांग कर सकती हैं।
वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और डॉलर की मजबूती जैसे कारणों से कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं हो पा रहे हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर हलचल का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में हालात नहीं सुधरे तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य वस्तुओं, सब्जियों, दूध, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे आम जनता पर महंगाई का बोझ और अधिक बढ़ने की आशंका है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के सामने फिलहाल बड़ी चुनौती यह है कि वह एक तरफ सरकारी तेल कंपनियों को घाटे से बचाए और दूसरी तरफ जनता को बढ़ती महंगाई से राहत भी दे। अब पूरे देश की नजरें सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाला फैसला सीधे करोड़ों लोगों की जेब पर असर डाल सकता है।



