शिवसेना (UBT) के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) ने महाराष्ट्र के संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर में माइनिंग की अनुमति दिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा सवाल खड़ा किया है। आदित्य ठाकरे ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव (Bhupender Yadav)
I have written to Union Minister Bhupendra Yadav ji for his intervention to stop the absolutely disastrous decision of the State Board for Wildlife to allow mining in Tiger Corridors.
Back in 2020, as Minister for Environment and Climate Change (Maharashtra), I had denied… pic.twitter.com/1y51sfTOKj
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) January 22, 2026
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया के जरिए पत्र की जानकारी साझा करते हुए कहा कि SBWL द्वारा टाइगर कॉरिडोर में माइनिंग को हरी झंडी देना न सिर्फ जंगलों के लिए बल्कि वहां रहने वाले वन्यजीवों के भविष्य के लिए भी बड़ा खतरा है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2020 में जब वे महाराष्ट्र के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री थे, तब उन्होंने ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व कॉरिडोर में मार्की-मंगली क्षेत्र में माइनिंग की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था।
अपने पत्र में आदित्य ठाकरे ने लिखा कि जनवरी के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने घोड़ाज़री वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के पास लोहारडोंगरी और ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व कॉरिडोर के मार्की-मंगली क्षेत्र में माइनिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ये प्रोजेक्ट्स उन जंगलों और उनमें रहने वाले वन्यजीवों के लिए बेहद नुकसानदायक हैं।
आदित्य ठाकरे ने तर्क दिया कि इन माइनिंग प्रोजेक्ट्स से मिलने वाला संभावित आउटपुट और राज्य को होने वाला रेवेन्यू, दोनों ही बहुत सीमित हैं, जबकि इससे होने वाला इकोलॉजिकल नुकसान अपूरणीय और दीर्घकालिक होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि SBWL के कुछ सदस्यों ने इन प्रोजेक्ट्स पर गंभीर आपत्तियां जताईं और विरोध भी किया, लेकिन इसके बावजूद चेयरमैन ने उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया।
पत्र के आखिर में आदित्य ठाकरे ने केंद्रीय मंत्री से नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) में इन प्रोजेक्ट्स पर दोबारा विचार करने और उन्हें खारिज करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि “हमारे जंगलों और वन्यजीवों का भविष्य अब आपके हाथों में है।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि इन प्रोजेक्ट्स को खारिज किया जाता है, तो यह संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत और सकारात्मक विरासत के रूप में याद किया जाएगा।
टाइगर कॉरिडोर जैसे संवेदनशील इलाकों में माइनिंग को लेकर उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण की बहस को तेज कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इस पर क्या रुख अपनाते हैं।



