महायुति सरकार (Mahayuti Government) शिष्यवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठा रही है। टीआरटीआई, बार्टी, सारथी, महाज्योति और अमृत जैसी स्वायत्त संस्थाओं के माध्यम से दी जाने वाली शिष्यवृत्तियों का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद और वंचित वर्ग के छात्रों तक पहुंचे, यही सरकार का मुख्य उद्देश्य है। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विधानसभा में दी।
(अजित पवार Ajit Pawar) ने स्पष्ट किया कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के वे छात्र, जिनके पास विदेश में शिक्षा लेने की आर्थिक क्षमता नहीं है लेकिन जो मेधावी हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जाएगी। सरकार का प्रयास है कि मार्च के अंत तक इन संस्थाओं को अधिकतम संभव निधि उपलब्ध कराई जाए।
बार्टी की शिष्यवृत्ति को लेकर विधानसभा सदस्य डॉ. नितिन राऊत द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ मामलों में एक ही परिवार के एक से अधिक छात्रों को शिष्यवृत्ति मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। इस संदर्भ में जानकारी संकलन की प्रक्रिया शुरू की गई है। वर्तमान में इन संस्थाओं का आधे से अधिक बजट अधिछात्रवृत्ति योजनाओं पर खर्च हो रहा है, जिससे अन्य जरूरतमंद छात्रों के लिए निधि उपलब्ध कराने में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि स्वायत्त संस्थाओं के वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी देने के मुद्दे पर मंत्रिमंडल में विस्तृत चर्चा हुई है। इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह तय किया गया कि अधिछात्रवृत्ति योजनाओं के लिए यूजीसी द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्पष्ट पात्रता मानदंड तय करें और छात्रों की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के आधार पर शेष अनुदान का वितरण सुनिश्चित करें।
राज्य सरकारच्या वतीनं टीआरटीआय, बार्टी, सारथी, महाज्योती, अमृत यांसारख्या स्वायत्त संस्थांच्या माध्यमातून दिल्या जाणाऱ्या शिष्यवृत्ती योजनेचा लाभ काही ठिकाणी एकाच कुटुंबातील एकापेक्षा अधिक विद्यार्थ्यांना मिळत असल्याच्या तक्रारी शासनाकडे प्राप्त झाल्या आहेत. या अनुषंगानं माहिती… pic.twitter.com/4WydHnUDvB
— Ajit Pawar (@AjitPawarSpeaks) December 13, 2025
सरकार प्रत्येक घटक के लिए लाभार्थियों की संख्या तय करने, शिक्षा के विभिन्न चरणों में कितने छात्रों को शिष्यवृत्ति दी जाए, इस पर भी नीति निर्णय लेगी। साथ ही शिष्यवृत्ति मंजूर करते समय संबंधित पाठ्यक्रमों का राज्य और समाज के विकास में योगदान, छात्रों की गुणवत्ता और उनकी आर्थिक स्थिति का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।
अजित पवार ने आगे कहा, “मैं किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा। जिन वंचित परिवारों के बच्चे मेधावी हैं लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर है, उन्हें महायुति सरकार प्राथमिकता से मदद करती है और आगे भी करती रहेगी।”
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि 30 मार्च तक संबंधित संस्थाओं को जल्द से जल्द निधि उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है और शेष राशि नियमित बजट के माध्यम से दी जाएगी।
