जो इंडिया / नागपुर: (BMC school land controversy)
राज्य में शिक्षा के अधिकार की गूंज एक बार फिर विधानसभा में सुनाई दी, जब विपक्ष ने महायुति सरकार पर बच्चों की पढ़ाई और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने का आरोप लगाया। सबसे गंभीर आरोप यह रहा कि मुंबई महानगरपालिका (मनपा) के 5 स्कूलों के कीमती प्लॉट निजी संस्थाओं को बेहद कम कीमत पर दे दिए गए, जिससे गरीब एवं मध्यमवर्गीय बच्चों की शिक्षा पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
विपक्ष का दावा है कि ग्वालिया टैंक स्थित दुर्गादेवी मनपा स्कूल की लगभग एक एकड़ जमीन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से निजी संस्था को बेच दी गई है। यह खुलासा कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने बुधवार को विधानसभा में किया। हैरानी की बात यह रही कि राज्य शिक्षा राज्यमंत्री के पास इस मुद्दे का स्पष्ट जवाब तक नहीं था और उन्होंने उत्तर पुस्तिका में भी गलत जानकारी दी थी।
मालवणी स्कूल निजीकरण पर उठा सवाल
प्रश्नोत्तर काल में विधायक असलम शेख ने सबसे पहले मालवणी के मनपा स्कूल के निजीकरण का मुद्दा उठाया। इस पर राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि स्कूल को ‘प्रयास’ संस्था को PPP मॉडल पर दिया गया है।
लेकिन जैसे ही अमीन पटेल ने मुंबई के अन्य 4 बड़े मनपा स्कूलों के प्लॉट निजी संस्थाओं को देने की जानकारी सदन में रखी—सदन में जोरदार हंगामा मच गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार गरीब बच्चों के लिए चलने वाले सार्वजनिक स्कूलों को जानबूझकर खत्म कर रही है।
गरीबों के बच्चों से छीना जा रहा शिक्षा का अधिकार?
अमीन पटेल ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि हर बच्चे को शिक्षा उपलब्ध कराए, लेकिन वर्तमान सरकार शिक्षा का व्यवसायीकरण करके गरीब बच्चों के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—
“आज स्कूलों की जमीनें निजी संस्थाओं को दी जा रही हैं। कल ये संस्थाएं 5-6 लाख रुपये सालाना फीस वसूलेंगी। तब इस सरकार के पास क्या जवाब होगा?”
उन्होंने यह भी कहा कि मनपा स्कूलों को गोद लेने की योजना 2007 में शुरू हुई थी, जिससे कई अच्छे कार्य हुए, लेकिन कुछ संस्थाओं ने इसे महज कमाई का जरिया बना लिया। ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरा स्कूल और उसकी जमीन बेच देना गलत है।
मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने दिया धार्मिक रंग?
सदन में जब विपक्ष के सवालों का मंत्री जवाब नहीं दे पा रहे थे, तब मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा बीच में खड़े हुए और मामले को धार्मिक तर्कों की ओर मोड़ने की कोशिश की।
लोढ़ा ने असलम शेख से पूछा कि फजलानी ट्रस्ट का स्कूल पर कब्जा बनाए रखने की मांग के पीछे उनका उद्देश्य क्या है?
उन्होंने दावा किया कि इस ट्रस्ट ने परीक्षा के समय स्कूल चलाने से मना कर दिया था और ‘प्रयास’ संस्था के आने के बाद ही परिणाम सुधरे हैं।
लोढ़ा ने आरोप लगाया कि—
“शेख मनपा स्कूल पर अपना कब्जा बनाए रखना चाहते हैं और उन्होंने मुझे इस मामले में धमकी भी दी थी।”
इस टिप्पणी पर शेख और लोढ़ा के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। लोढ़ा ने आगे कहा कि मालवणी में 100 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है और वहां की जनसंख्या 20% से बढ़कर 37% हो चुकी है, जिसका असर स्कूलों पर दिख रहा है।
मनपा की जमीनें बिकने का आरोप
अमीन पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि—
“सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है शिक्षा देना, लेकिन महायुति सरकार मुंबई मनपा की कीमती जमीनें निजी संस्थानों और बिल्डरों को बेच रही है। मनपा खुद सीबीएसई और पब्लिक स्कूल चला रही है और बेहतरीन परिणाम दे रही है, तो फिर स्कूल की जमीन निजी संस्थाओं को देने की क्या जरूरत?”
उन्होंने कहा कि यह कदम सीधे-सीधे शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है और गरीब परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा से दूर करने की साजिश है।
नतीजा: शिक्षा पर राजनीति गर्म
मनपा स्कूलों के निजीकरण और कीमती जमीन निजी संस्थानों को सौंपने के मुद्दे ने महायुति सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने इसे “बच्चों के भविष्य की नीलामी” करार दिया है।
सदन में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ने वाला है।
