जो इंडिया/मुंबई : (Maharashtra political controversy)
आव्हाड ने कहा कि महाराष्ट्र में सत्ता का खेल केवल कुर्सी और स्वार्थ की राजनीति तक सीमित हो चुका है। उन्होंने इशारा किया कि जो नेता जिस दल से लाभ पाता है, वहीं जाकर टिकता है। यह कहावत उसी स्थिति को दर्शाती है कि जिस गांव का बोर (पेड़) है, उसी गांव की बाबड़ी (कुआं/तालाब) भी इस्तेमाल होती है, यानी जहां से लाभ मिले, वहीं सब लोग खिंच जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि राजनीति अब विचारधारा से हटकर पूरी तरह सत्ता और व्यक्तिगत स्वार्थ तक सिमट चुकी है। जनता से किए वादे भूला दिए जाते हैं, विकास की बातें केवल भाषणों तक सीमित रह गई हैं। आव्हाड ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा, और आम जनता महंगाई से कराह रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जब जनता परेशान है, तो नेता किसके लिए राजनीति कर रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों में आज जो हालात बने हैं, उसमें हर कोई केवल अपने फायदे के हिसाब से पार्टी बदलता है और जनता को भ्रमित करता है।
आव्हाड का यह बयान राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इसे सत्ता में बैठे नेताओं पर सीधा कटाक्ष मान रहे हैं, जबकि समर्थक इसे आम आदमी की आवाज बता रहे हैं।
