जो इंडिया/महाराष्ट्र: महाराष्ट्र राज्य भर के डॉक्टर 18 सितंबर (गुरुवार) को 24-घंटे की हड़ताल पर जाने का निर्णय कर चुके हैं। यह विरोध प्रदर्शन भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (IMA) महाराष्ट्र चैप्टर, वरिष्ठ रेसिडेंट डॉक्टरों, चिकित्सा अधिकारियों और अन्य चिकित्सकीय निकायों द्वारा हो रहा है। हड़ताल सुबह 8 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 8 बजे तक चलेगी।
विरोध का कारण
राज्य सरकार ने एक नया सरकारी निर्देश (Government Resolution) जारी किया है जिसमें होम्योपैथिक चिकित्सकों (homeopathic practitioners), जिन्होंने Certificate Course in Modern Pharmacology (CCMP) नामक पाठ्यक्रम पूरा किया हो, उन्हें महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण करने की अनुमति दी जाए। यह कदम होम्योपैथिक डॉक्टरों को कुछ परिस्थितियों में एलोपैथिक दवाइयां लिखने का अधिकार देगा।
IMA और अन्य चिकित्सकीय संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनका कहना है कि CCMP पाठ्यक्रम MBBS के प्रशिक्षण जैसा नहीं है; इससे मरीजों की सुरक्षा, दवाओं की खुराक (dosage), दुष्प्रभावों (side-effects), एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance) आदि में जोखिम बढ़ सकता है।
IMA ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें इस GR को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।
हड़ताल के दौरान क्या बंद रहेगा, क्या चलेगा
OPD सेवाएँ (नियमित गैर-आपात सेवाएँ) बंद रहेंगी अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों में।
Elective/non-emergency सर्जरी और योजनाबद्ध चिकित्सा (scheduled treatments) प्रभावित या बंद हो सकती है।
आपातकालीन सेवाएँ (emergency services) और जीवन रक्षक ऑपरेशन चालू रहेंगी।
अस्पतालों में भर्ती (in-patient) / ICU आदि आमतौर पर इनसे जुड़ी आपात सेवाएँ काम करेंगी; अन्य गैर-जरूरी प्रक्रियाएँ स्थगित हो सकती हैं।
प्रभावित क्षेत्र और डॉक्टरों की संख्या
लगभग 1.8 लाख अलोपैथिक डॉक्टर राज्य भर में इस हड़ताल में शामिल होंगे।
सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ रेसिडेंट डॉक्टर, MARD (Maharashtra Association of Resident Doctors), BMC MARD और अन्य डॉक्टर संगठन सक्रिय हैं।
संभावित प्रभाव और सार्वजनिक सलाह
जनता को OPD व अन्य गैर-आपात चिकित्सा सेवाओं हेतु अस्पतालों में जाने पर परेशानी हो सकती है। लंबी प्रतीक्षा हो सकती है या सेवाएँ उपलब्ध न हों।
योजनाबद्ध इलाज, जाँच-परीक्षण जो सामान्य दौर में होते हैं, वे प्रभावित होंगे।
आपात स्थितियों में अस्पताल खुलेंगे, मरीजों को जीवन-रक्षक इलाज मिलेगा। लेकिन यात्रा करें, अस्पताल पहुँचें, समय की जानकारी लें क्योंकि अस्पतालों में संसाधन सीमित हो सकते हैं।
डॉक्टरों ने सरकार से अपील की है कि इस निर्णय को वापस लिया जाए और चिकित्सा शैक्षणिक मानकों की रक्षा की जाए।
