जो इंडिया / मुंबई: (BMC hospital controversy)
मुंबई के सायन अस्पताल (Sion Hospital) में 23 जुलाई को एक गंभीर घटना सामने आई, जब पुणे की एक कंपनी द्वारा सप्लाई की गई संदिग्ध सलाइन (IV) लगाने के तुरंत बाद कई मरीजों की हालत बिगड़ गई। सलाइन लगने के कुछ ही मिनटों में मरीजों को ठंड लगने और तेज बुखार जैसे लक्षण दिखे, जिसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया।
> डीन, डॉ. मोहन जोशी: “शिकायत मिलते ही संबंधित कंपनी की सलाइन का उपयोग रोका गया है। कारण की अंतिम पुष्टि एडीआर और एफ़डीए की रिपोर्ट से होगी।”
इस घटना में दो मरीजों की मौत हो गई, जबकि करीब 25 मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच गए और 50 से अधिक ने शिकायत दर्ज कराई। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत उसी बैच की सलाइन के उपयोग पर रोक लगा दी और सैंपल जांच के लिए एडीआर (Adverse Drug Reaction) सेल और एफडीए लैब को भेज दिए।
घटना को बीस दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक सप्लायर कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे परिजनों में नाराजगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मनपा के अन्य अस्पतालों में भी इसी कंपनी की सलाइन सप्लाई हुई है, इसलिए पूरे शहर में बैच रिकॉल और व्यापक जांच जरूरी है।
डॉक्टरों के मुताबिक भर्ती के शुरुआती चरण में अधिकांश मरीजों को IV सलाइन दी जाती है। सायन अस्पताल में प्रतिदिन करीब 2,500 मरीज उपचार लेते हैं, जिनमें बड़ी संख्या को दिन में कई बार सलाइन लगती है। सूत्र बताते हैं कि मनपा के अन्य अस्पतालों में भी इसी कंपनी की सलाइन की सप्लाई हुई है, इसलिए शहर-स्तरीय बैच रिकॉल और क्रॉस-चेक जरूरी है।
एडीआर और एफडीए की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौतों और बीमारियों का असली कारण यही सलाइन थी या नहीं। तब तक मरीजों और परिजनों में डर का माहौल बना हुआ है।



