केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित संविधान गौरव उत्सव के मौके पर कहा कि देश को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान दुनिया का सबसे श्रेष्ठ संविधान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय संसदीय लोकतंत्र की आत्मा संविधान में निहित है और इसकी वजह से ही भारत की एकता और अखंडता मजबूत बनी हुई है। अठावले ने साफ शब्दों में कहा कि “किसी के पिता का पिता भी आ जाए, संविधान को बदला नहीं जा सकता।”
उत्सव में रिपब्लिकन पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष फखरे आलम गुड्डू, अनिल कुमार सिंह, मिर्जा मेहताब बेग और कई अन्य पार्टी पदाधिकारी उपस्थित थे। अठावले ने इस अवसर पर पार्टी की ऐतिहासिक उपलब्धियों और उत्तर भारत में रिपब्लिकन पार्टी की ताकत पर भी प्रकाश डाला।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना 3 अक्टूबर 1957 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की अवधारणा के आधार पर की गई थी। पार्टी उत्तर भारत के कई राज्यों में विशेषकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक ताकत रखती थी। 1960 के दशक में पार्टी के 9 सांसद संसद में चुने गए थे। उस समय उत्तर भारत की कई सरकारों में RPI के मंत्री भी शामिल थे। पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी था, जो शक्ति और अखंडता का प्रतीक माना जाता है।
अठावले ने कहा कि उत्तर भारत में पार्टी की ताकत घटने का कारण कुछ नेताओं का अन्य दलों में शामिल होना रहा। विशेष रूप से बीपी मौर्य के कांग्रेस पार्टी में जाने के बाद उत्तर भारत में पार्टी का प्रभाव कमजोर हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि रिपब्लिकन पार्टी के सुनहरे दिन वापस लाए जाएं और पार्टी को एक मजबूत विपक्षी शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के राजनीतिक दृष्टिकोण और रिपब्लिकन पार्टी के इतिहास को याद करते हुए कहा कि आंबेडकर चाहते थे कि पार्टी के माध्यम से सभी विपक्षी दलों को एकजुट करके कांग्रेस के खिलाफ मजबूत विपक्षी शक्ति बनाई जाए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इसी सोच के तहत बाद में इंदिरा गांधी की कांग्रेस के खिलाफ जनता पार्टी का गठन किया गया था, जो सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने का एक्सपेरिमेंट था।
रामदास अठावले ने यह स्वीकार किया कि “हमें अफ़सोस है कि हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के कलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी को उत्तर भारत में एकमात्र मज़बूत विपक्षी पार्टी के रूप में स्थापित नहीं कर पाए। लेकिन अब हमें पार्टी को फिर से सशक्त बनाना होगा और डॉ. आंबेडकर के विज़न को पूरा करना होगा।”
इस मौके पर अठावले ने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पार्टी के सुनहरे इतिहास को याद रखें, संविधान का सम्मान करें और रिपब्लिकन पार्टी को उत्तर भारत में फिर से मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का जिम्मा भी है।
इस उत्सव ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान और रिपब्लिकन पार्टी के योगदान को नए सिरे से रेखांकित किया और यह संदेश दिया कि पार्टी जनता के विश्वास और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रहेगी।



