जो इंडिया / मुंबई:
मुंबई और नासिक में स्थिति सबसे गंभीर
मुंबई में छह संगठनात्मक जिले हैं, जिनमें से केवल तीन में ही अध्यक्ष की घोषणा हुई है। इनमें भी दो पुराने नेताओं को ही रिपीट किया गया है, जबकि केवल एक जिले में नया चेहरा लाया गया है। शेष तीन जिलों – उत्तर पश्चिम, दक्षिण मध्य और दक्षिण मुंबई – में गुटबाजी के चलते नियुक्ति नहीं हो सकी है।
वहीं नासिक के तीनों जिलों में किसी भी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
मुंबई में ‘भइया’ नेताओं को नहीं मिला प्रतिनिधित्व
उत्तर भारतीय समाज से आने वाले नेताओं को इस बार नजरअंदाज किया गया है। मुंबई में घोषित तीनों जिलाध्यक्ष मराठी मूल के हैं, जिससे उत्तर भारतीय गुट में नाराजगी देखी जा रही है।
नेतृत्व की कोशिशें और सुप्रीम कोर्ट का दबाव
भाजपा ने वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की अगुवाई में उत्तर मुंबई, उत्तर-पूर्व मुंबई और उत्तर-मध्य मुंबई के लिए दीपक तावडे, दीपक दळवी और विरेंद्र म्हात्रे को जिम्मेदारी सौंपी है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव 4 महीनों के भीतर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद भाजपा ने संगठनात्मक चुनावों को जल्द निपटाने की कवायद शुरू की, लेकिन अंदरूनी कलह इसमें बाधा बन रही है।
फूट के डर से कुछ जिलाध्यक्ष दोबारा नियुक्त
ऐसे कई जिले हैं, जहां विवाद से बचने के लिए मौजूदा जिलाध्यक्ष को ही दोबारा नियुक्त कर दिया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब 14 जिलों में पुराने अध्यक्षों को ही रिपीट किया गया है।
जिलाध्यक्ष पद को लेकर भाजपा में मचा घमासान आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो संगठनात्मक ढांचे को मज़बूत करना भाजपा नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
