जो इंडिया / मुंबई: (BMC Election Campaign Controversy)
मुंबई महानगरपालिका (मनपा) चुनाव के लिए मतदान में अब महज चार दिन शेष हैं। मनपा जैसे महत्वपूर्ण निकाय के जरिए शहरवासियों की रोजमर्रा की जरूरतें—सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमिगत नालियों जैसी मूलभूत सुविधाएं—सीधे तौर पर प्रभावित होती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बार चुनावी प्रचार में ये सभी अहम मुद्दे लगभग नदारद नजर आ रहे हैं।
चुनावी मैदान में उतरे अधिकांश उम्मीदवार विकास और जनहित की बात करने के बजाय मतदाताओं को लुभाने के लिए मांसाहारी दावतों, शराब, नकद राशि और महंगे गिफ्ट का सहारा ले रहे हैं। प्रचार अब विचारों और योजनाओं की नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत और खर्च की प्रतिस्पर्धा बनता जा रहा है।
शराबखाने और होटल बने प्रचार केंद्र
पिछले कुछ दिनों में शहर के कई इलाकों में यह देखा गया है कि कुछ उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों और मतदाताओं के लिए शराबखानों और होटलों को ही प्रचार का अड्डा बना लिया है। कहीं खुलेआम शराब परोसी जा रही है तो कहीं बिरयानी और अन्य मांसाहारी भोजन के डिब्बे मतदाताओं के घर-घर पहुंचाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा की एक महिला उम्मीदवार द्वारा प्रतिदिन मतदाताओं के समूह को 5 से 7 किलो बिरयानी भिजवाई जा रही है। वहीं शिंदे गुट के एक उम्मीदवार भी रोजाना भोजन के डिब्बे वितरित कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर शराब प्रेमियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिसमें शिक्षित और उच्च शिक्षित मतदाता भी शामिल हैं।
मुद्दों की जगह पैसों की होड़
चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में यह साफ नजर आ रहा है कि मुकाबला विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि पैसों की ताकत पर लड़ा जा रहा है। कौन कितना खर्च कर सकता है, कौन कितने लोगों को भोजन, शराब या उपहार दे सकता है—यही जीत-हार का पैमाना बनता जा रहा है।
गिफ्ट वितरण बना मुख्य हथियार
कई उम्मीदवारों ने गिफ्ट वितरण को प्रचार का प्रमुख हथियार बना लिया है। वार्ड 180 में शिंदे गुट की ओर से महंगे गिफ्ट बांटे जा रहे हैं। समाज मंदिरों को नकद दान दिया गया है, जबकि कीर्तन मंडलों और योग संस्थाओं को ध्वनि प्रणाली समेत अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है। वरिष्ठ नागरिकों को भी उनकी जरूरतों के अनुसार वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है, ताकि उनका समर्थन हासिल किया जा सके।
करोड़पति उम्मीदवारों की भरमार
मनपा चुनाव के मैदान में इस बार हजारों उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। नामांकन के साथ दाखिल किए गए शपथपत्रों से सामने आया है कि इनमें से सैकड़ों उम्मीदवार करोड़पति हैं। खास बात यह है कि इन करोड़पति उम्मीदवारों में बड़ी संख्या भाजपा से जुड़े नेताओं की है।
वहीं दूसरी ओर, कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिन्होंने अपने शपथपत्र में यह दर्शाया है कि उनके पास एक रुपया भी संपत्ति नहीं है। उन्होंने अपनी चल और अचल संपत्ति को शून्य बताया है, जो चुनावी राजनीति की एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।
लोकतंत्र पर सवाल
शराब, बिरयानी और गिफ्ट के सहारे चल रहा यह चुनावी प्रचार लोकतंत्र की मूल भावना पर सवाल खड़े कर रहा है। विकास के मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं और मतदाता भी लालच के इस जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मतदान के दिन जनता पैसों के प्रभाव में फैसला करती है या फिर विकास और ईमानदार नेतृत्व को प्राथमिकता देती है।
BMC Election Campaign Controversy: पैसे, शराब और बिरयानी की राजनीति मनपा चुनाव में विकास पर भारी पड़ा लालच का प्रचार

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