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मुंबई के इस अंडरवर्ल्ड डॉन की बेटी के साथ हुई थी दरिंदगी, आज भी न्याय का इंतजार, केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र

Haji Mastan

मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास में डॉन हाजी मस्तान (Mumbai underworld don Haji Mastan) का नाम एक अहम अध्याय माना जाता है। तस्करी और अपराध की दुनिया से लेकर राजनीति में कदम रखने तक, हाजी मस्तान का सफर विवादों से भरा रहा। हालांकि, जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हो सके।

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हाजी मस्तान (Haji Mastan) के निधन के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बेटी हसीन मस्तान (Hasin Mastan) के साथ कथित तौर पर बलात्कार हुआ और उनकी हत्या की कोशिश भी की गई। वहीं, उनकी पत्नी सोना मस्तान को भी गायब करने की कोशिश का आरोप सामने आया। इन तमाम घटनाओं को लेकर अब हसीन मस्तान ने खुलकर अपनी पीड़ा साझा की है। “मुझे मेरे पिता के नाम से मत जोड़िए” — हसीन मस्तान

ANI को दिए एक इंटरव्यू में हसीन मस्तान ने कहा (Hasin Mastan Interview), “मैं लोगों से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि मेरे पिता को अंडरवर्ल्ड डॉन कहकर न पुकारें। मेरे पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। जब लोग उनके बारे में कुछ भी बोलते हैं, तो मुझे बहुत तकलीफ होती है। यह कहानी मेरे पिता की नहीं, मेरी है। यह मेरी लड़ाई है।”

हसीन ने कहा कि उनकी हत्या की कोशिश की गई, लेकिन आज भी वह जीवित और सुरक्षित हैं। “अगर मैं आज यहां सुरक्षित बैठी हूं, तो इसका मतलब है कि मेरे पिता ने जीवन में कुछ अच्छे काम भी किए होंगे,” — ऐसा बयान उन्होंने इंटरव्यू में दिया।

पीएम मोदी और अमित शाह को लिखा पत्र

हसीन मस्तान ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर देश में कानूनों को और सख्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आज देश में बच्चों के अपहरण, यौन शोषण और अन्य अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए कड़े कानून और त्वरित न्याय व्यवस्था की जरूरत है।

हसीन ने कहा, “मुझे न्याय चाहिए। सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों और महिलाओं के लिए जो अन्याय और अत्याचार का शिकार हो रहे हैं।” “यह मेरी लड़ाई है” हसीन मस्तान ने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता की विरासत को लेकर नहीं, बल्कि अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने अपील की कि समाज और सरकार मिलकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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