जो इंडिया / मुंबई /ठाणे: (Shrikant Shinde Thackeray brothers comment)
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक नया टकराव उभर रहा है, जिसमें शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे ने ठाकरे परिवार-प्रमुखों पर स्पष्ट रूप से हमला बोला है। उन्होंने एक विभागीय बैठक में कहा “मराठी माणूस जेव्हा मुंबईबाहेर गेला, तेव्हा ठाकरे बंधु कुठे होते?”, जिससे ठाकरे पक्ष को मुश्किल में डाल दिया।
सोमवार को बुलढाणा जिले में आयोजित एक सभा में, श्रीकांत शिंदे ने कहा कि जब महाराष्ट्र के किलों (गढ़ों) और पर्यटन केंद्रों को विकसित करने की योजना है — जैसे “नमो टुरिझम सेंटर” — उसपर कुछ नेता निशाना साधते दिख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीति सिर्फ विरोध के लिए है, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक वारसा के संरक्षण हेतु नहीं।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने MNS के राज ठाकरे एवं उद्धव ठाकरे की गठबंधन की गलती पर भी जोर दिया। उन्होंने इसे “ठाकरे परिवार के लिए बनाए गए गठबंधन” कहा, जिसमें राज्य-हित पीछे है और व्यक्तिगत सत्ता आगे है।
श्रीकांत शिंदे का कहना है कि उनकी पार्टी (शिवसेना-शिंदे गुट) अब मराठी भाषीय के हित के लिए आगे खड़ी है और उन्हें लगता है कि ठाकरे परिवार की राजनीति में वास्तविक बदलाव, समर्पित नेतृत्व या जनहित का भाव नहीं दिख रहा।
राजनीतिक विश्लेषक इस टिप्पणी को आगामी चुनाव-दिसा में एक संकेत मान रहे हैं, जहाँ शिवसेना के आंतरिक समीकरण, गठबंधन-रणनीति, और मराठी जन-आशाओं को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं।



