जो इंडिया / मुंबई:
आरोप है कि शिक्षा विभाग के उप निदेशक संदीप सांगवे ने तकरीबन 2,000 शिक्षकों की फाइलें जानबूझकर रोककर रखीं और बाद में डराकर एक से दो लाख रुपये की मांग की। इसके अलावा पैसे लेकर कुछ शिक्षकों को डबल ड्यूटी—दिन में नियमित और रात में नाइट स्कूलों में पढ़ाने का मौका दिया गया, जबकि अन्य सैकड़ों शिक्षक काम के अभाव में बैठे रह गए।
मामले के तूल पकड़ते ही सरकार ने संबंधित अधिकारी का आनन-फानन में तबादला कर दिया है, लेकिन विधायक संजय उपाध्याय और पूर्व विधायक नागोजी गानार ने इस घोटाले की एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा है कि केवल ट्रांसफर से बात नहीं बनेगी। नागपुर में इसी तरह के शालार्थ कार्ड घोटाले की जांच पहले से जारी है, और जल्द ही उसकी रिपोर्ट आने की संभावना है।
महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद के महासचिव शिवनाथ दराडे ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिस कारण वह पिछले 12 वर्षों से उसी पद पर बना हुआ था और खुलेआम अवैध वसूली कर रहा था।



