दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की वसीयत को लेकर विवाद (Sanjay Kapoor Will Controversy) और तेज़ हो गया है। दिल्ली हाई कोर्ट में उनकी मां रानी कपूर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने वसीयत की प्रामाणिकता, इसे तैयार करने वालों की भूमिका और प्रिय सचदेव कपूर की तेज़ कॉर्पोरेट वापसी पर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।
गग्गर ने अदालत को बताया कि 31 मार्च 2023 को संजय कपूर ने खुद AIPL—जो Sona BLW की होल्डिंग कंपनी है—से प्रिय कपूर को हटाया था। लेकिन 12 जून 2025 को उनकी मौत के सिर्फ आठ दिन बाद प्रिय फिर से कंपनी की MD बना दी गईं। यही नहीं, 11 दिनों के भीतर उन्हें Sona BLW के बोर्ड में भी जगह मिल गई।
गग्गर के अनुसार, संजय कपूर (Sanjay Kapoor) की मौत के तुरंत बाद की यह तेजी “असामान्य और संदिग्ध” है—खासतौर पर इसलिए कि उस समय तक संजय का शव तक परिवार को नहीं सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि यह कॉर्पोरेट कदम वसीयत की मंशा पर भी संदेह पैदा करते हैं।
परिवार को बाहर कर प्रिय एकमात्र लाभार्थी
परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि वसीयत में संजय की मां रानी, बेटी समायरा और बेटे कियान—जो सभी कानूनी वारिस हैं—को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। गग्गर ने कहा कि यह संजय के स्वभाव, व्यवहार और उनके रिश्तों से मेल नहीं खाता। यदि प्रिय का दावा सही है कि वसीयत पहले से तैयार थी, तो फिर इसे नोटराइज़ क्यों नहीं किया गया?
गवाहों की भूमिका पर भी संदेह
- वसीयत के दो गवाहों—दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा—की भूमिका भी प्रश्नों के घेरे में है।
- अग्रवाल वसीयत allegedly भेजने से दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती थे।
- महीनों तक उन्होंने रानी कपूर के ईमेल का जवाब नहीं दिया और बाद में लिखा कि वह किसी दस्तावेज़ के “कस्टोडियन नहीं” हैं।
- दूसरी ओर नितिन शर्मा को संजय की मौत के तुरंत बाद AIPL बोर्ड में नियुक्त कर दिया गया।
गग्गर ने पूछा, “क्या यह किसी तरह का प्रोत्साहन था?”
आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप
गग्गर ने अदालत को बताया कि संजय की वार्षिक आय ₹60 करोड़ से अधिक थी, लेकिन बैंक खातों में ₹2 करोड़ से कम बैलेंस मिला। इसके अलावा, वसीयत जमा होने के तुरंत बाद कई खातों से रकम निकालने का दावा भी किया गया।
मां रानी कपूर की उपेक्षा पर सवाल
रानी कपूर—जो Sona Group की सह-संस्थापक और पूर्व चेयरपर्सन रही हैं—को वसीयत में पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है।
संजय की बहन मंधिरा ने कहा कि राजोकरी स्थित परिवार का घर उनकी मां ने “ईंट-ईंट जोड़कर बनाया”, लेकिन अब वह उसमें प्रवेश तक नहीं कर सकतीं।



