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RSS message to BJP: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान – “संघ किसी से मांगता नहीं, हिंदू राष्ट्र का मतलब सत्ता नहीं बल्कि न्याय और समानता”

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जो इंडिया/नई दिल्ली। (RSS message to BJP)

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को एक ऐसा बयान दिया है जिसे राजनीतिक गलियारों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दी गई नसीहत के रूप में देखा जा रहा है। संघ प्रमुख ने कहा कि “हिंदू राष्ट्र” की अवधारणा को बार-बार गलत ढंग से पेश किया जाता है। इसे अक्सर सत्ता, राजनीति और शासन से जोड़कर देखा जाता है जबकि इसका वास्तविक अर्थ है – समाज में बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करना।

भागवत ने यह बात संघ की शताब्दी व्याख्यान श्रृंखला ‘100 साल की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के उद्घाटन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि “हम किसी से मांगते नहीं हैं। संघ किसी भी सहयोगी संगठन को सीधे या परोक्ष रूप से नियंत्रित नहीं करता। सभी संगठन अपने निर्णय लेने में स्वतंत्र और स्वायत्त हैं।”

हिंदू राष्ट्र की परिभाषा पर जोर

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी व्यक्ति, धर्म, भाषा या विचारधारा को अलग करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग विचारधारा होना कोई अपराध नहीं है और यह लोकतंत्र की खूबसूरती है। उनका कहना था कि हिंदू राष्ट्र का आधार न्याय, समानता और सबके लिए सम्मान है।

बीजेपी को अप्रत्यक्ष संदेश

RSS प्रमुख के इस बयान को बीजेपी नेतृत्व और संगठनात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इन दिनों बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। ऐसे में भागवत का यह कहना कि संघ किसी भी संगठन को नियंत्रित नहीं करता, इस बात का इशारा है कि पार्टी को अपने फैसले खुद लेने चाहिए।

संघ और राजनीति का रिश्ता

मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम राष्ट्र निर्माण और समाज में समरसता लाना है। राजनीतिक सत्ता पाना संघ का लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि “स्वयंसेवकों का योगदान राजनीति समेत कई क्षेत्रों में दिखता है, लेकिन संघ केवल विचार और कार्य पर ध्यान देता है, आदेश या नियंत्रण नहीं करता।”

क्यों अहम है यह बयान?

बीजेपी के नए अध्यक्ष की चर्चा के बीच संघ की स्थिति स्पष्ट।

हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को केवल सत्ता तक सीमित मानने वाली सोच पर प्रहार।

सभी सहयोगी संगठनों को स्वतंत्र रूप से काम करने का संदेश।

समाज में समरसता और न्याय को केंद्र में रखने पर जोर।

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