बीएमसी (Brihanmumbai Municipal Corporation) सहित महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के चुनावों की घोषणा किसी भी दिन होने वाली है, लेकिन उससे पहले ही राज्य में सियासी तापमान के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच एनसीपी (NCP) नेता रोहित पवार (Rohit Pawar) का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया गया तीखा बयान सीधे-सीधे फडणवीस सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रोहित पवार ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि चुनावों में गुंडों के इस्तेमाल ने उन्हें यह यकीन दिला दिया है कि सत्ता भी उनकी है। इसी गलतफहमी ने उनका हौसला इस कदर बढ़ा दिया है कि अब वे पुलिस की वर्दी पर भी हाथ उठाने से नहीं डर रहे। कांदिवली में पुलिसकर्मियों के साथ हुई मारपीट की घटना को इसी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस खतरनाक मानसिकता का संकेत है जिसमें अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं रह गया है।
निवडणुकीसाठी गुंडांचा वापर केल्यामुळं सरकारही आमचंच असल्याचा गुंडांचा समज झाला असून आणि यातूनच थेट पोलिसांच्या वर्दीवर हात टाकण्यापर्यंत त्यांची डेअरिंग वाढू लागलीय. पोलिसांना मारहाण करण्याचा कांदीवलीतील हा प्रकारही याच पठडीतला दिसतोय, पण अशा पद्धतीने पोलिसांचा वचक कमी होत गेला… pic.twitter.com/jSFIYSqQOE
— Rohit Pawar (@RRPSpeaks) December 15, 2025
पवार ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पुलिस की सतर्कता और प्रशासन की सख्ती इसी तरह कमजोर होती रही, तो गुंडे खुलेआम सड़कों पर राज करेंगे और आम नागरिक का चैन से सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। यह स्थिति लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए बेहद खतरनाक है।
उन्होंने यह भी साफ कहा कि पुलिस भले ही इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रही हो, लेकिन इसके लिए सरकार को पुलिस को पूरी छूट और राजनीतिक संरक्षण से मुक्त माहौल देना होगा। जब तक पुलिस को निष्पक्ष और निर्भीक होकर काम करने की आज़ादी नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद ही रहेंगे।
रोहित पवार का यह बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी दौर से पहले राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने अंत में दो टूक शब्दों में कहा कि एनसीपी पूरी तरह महाराष्ट्र पुलिस के साथ खड़ी है। सवाल अब यह है कि क्या सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेगी, या फिर चुनावी फायदे के लिए कानून-व्यवस्था को दांव पर ही छोड़ दिया जाएगा?



