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मानसून में खतरनाक इमारतों में रहने को लोग मजबूर महामुंबई में 10 हजार से ज्यादा इमारतें खतरनाक मुंबई के 188 जर्जर इमारतों में 2300 परिवारों को खतरा

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मुंबई। मानसून के दौरान मुंबई सहित आसपास के शहरों में जर्जर इमारतों के ढहने का खतरा बना रहता है। मुंबई में खतरनाक इमारतों की संख्या लगभग 6 हजार है तो अति खतरनाक इमारतों की सूची में 188 इमारतों को शामिल किया है। मुम्बई के इन बेहद जर्जर इमारतों में लगभग 2300 परिवार रहते हैं। इस मानसून में इन इमारतों में रहने वाले परिवारों की जान को खतरा है। मनपा ने इन इमारतों के निवासियों से तुरंत खाली करने और सुरक्षित आवास में स्थानांतरित होने का आग्रह किया है।

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मनपा के अधिकार क्षेत्र में आने वाली इन 188 इमारतों को मनपा अधिनियम, 1888 की धारा 354 के तहत आधिकारिक तौर पर ‘खतरनाक और जर्जर घोषित किया है। इनमें से 27 शहर, 114 पश्चिमी उपनगर और 47 पूर्वीय उपनगर में हैं। मनपा के बार-बार नोटिस और अपील के बावजूद कुछ इमारतों को निवासी लोग खाली नहीं रहे हैं। मनपा सूत्रों की माने तो इन इमारतों में अब भी लगभग 2300 परिवार रहता है।

जर्जर इमारतों की सबसे अधिक संख्या के /वेस्ट वार्ड (अंधेरी, जुहू, विले पार्ले) में कुल 28 इमारते हैं। इसके बाद पी नॉर्थ वार्ड (मलाड पूर्व और पश्चिम) में 22 ऐसी खतरनाक इमारतें हैं। इसके अतिरिक्त, आर सेंट्रल वार्ड (बोरीवली पश्चिम) में 19 इमारतों को खतरनाक घोषित किया है। सी वार्ड (धोबी तलाओ) में केवल एक इमारत जर्जर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 2023 में मनपा ने कुल 216 इमारतों को खतरनाक और जर्जर घोषित किया था। जानकारी के अनुसार 5 वर्ष पहले मनपा ने मुम्बई भर में कुल 419 आवासीय इमारतों को अति जर्जर एवं खतरनाक पाया था। उनमें से 193 इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया है। 100 से अधिक इमारतों के खिलाफ अदालत में मामले लंबित हैं। 82 इमारतों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। कुछ में बिजली और पानी के कनेक्शन बंद कर दिए गए थे।

म्हाडा ने अपने 700 खतरनाक इमारतों में से 20 को अति धोखादायक बताया है। म्हाडा अधिकारियों के अनुसार, गिरगांव, कालबादेवी, खेतवाड़ी, कमाठीपुरा और वीपी रोड सहित क्षेत्रों में ये 20 इमारतें 80 साल से अधिक पुरानी हैं। यहां 545 इमारतें आवासीय हैं। और 21 इमारतें गैर आवासीय हैं। आवासीय इमारतों में से कुल 20 उच्च जोखिम वाली इमारतें हैं।

महामुंबई के अन्य शहरों में कमोबेश यही हाल

मुंबई से सटे शहर ठाणे में भी 4 हजार से अधिक खतरनाक इमारतों में से 72 इमारतें बेहत खतरनाक है। उसी तरह नवी मुम्बई, कल्याण और उल्हासनगर में भी क्रमशः 545, 68 तो 43 इमारतें बेहद खतरनाक सूची में हैं। इसे लेकर प्रशासन भी टेंशन में हैं। जिनमे रहने वालों को प्रशासन हटाना तो चाहती है लेकिन बिना कोइ उचित व्यवस्था के कोई खाली नहीं करना चाहता। ऐसे में जहां प्रशासन लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करने में नाकाम साबित हो रही है वहीं लोग जिंदगी जर्जर इमारतों में गुजारने को मजबूर हैं। एक निवासी की माने तो जब प्रशासन उन्हें विकल्प नहीं दे रही है तो वे जाएं कहां, किसके सहारे मानसून में घर खाली करें ऐसे कई सवाल उनके जेहन में आ रहे हैं। उधर प्रशासन नोटिस दे कर अपना पल्ला झड़ना चाहती है।

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