जोइंडिया /मुंबई: मुंबई में शुक्रवार को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के कथित अपमान के विरोध में जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT)
इस महामोर्चा का आयोजन मध्य प्रदेश में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर (Dr Babasaheb Ambedkar) को लेकर दिए गए अपमानजनक बयानों के विरोध में किया गया। आयोजकों ने साफ कहा कि बाबासाहेब और संविधान पर हमला सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महामोर्चा में शामिल वक्ताओं ने कहा कि महाराष्ट्र मणिपुर जैसा नहीं होने देगा। यहां संविधान, सामाजिक न्याय और समानता की परंपरा है। मनुवादी सोच और नफरत की राजनीति को राज्य में पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और मनुवादी ताकतें लगातार डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान करती रही हैं और समाज को बांटने का काम कर रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि समाज में ज़हर घोलने वाले RSS और मनुवादी संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक बयान देने वालों पर पुलिस और सरकार तुरंत सख्त कार्रवाई करे।
महामोर्चा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने दो टूक कहा कि संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ अंबेडकरवादियों की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक की है। शोषित, वंचित और पीड़ित वर्गों पर हो रहे अन्याय और अत्याचार को अब और सहन नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान BJP पर भी तीखा हमला बोला गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने देश में लोकतंत्र का मज़ाक बना दिया है। यह लड़ाई किसी एक जाति या वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे देश, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई है।
महामोर्चा के अंत में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की खुलकर निंदा की गई और मांग की गई कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और भारतीय संविधान को बदनाम करने वाले देशद्रोही मानसिकता के लोगों के खिलाफ तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस विशाल मार्च में सागर गवई सहित कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में संविधान प्रेमी नागरिक मौजूद रहे। आयोजकों ने साफ संदेश दिया कि बाबासाहेब के सम्मान और संविधान की रक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।


