मुंबई/सांगली: (Organic Farming Success)
करीब 20 साल तक पारंपरिक तरीके से हल्दी की खेती करने वाले विनोद तोडकर को समय के साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मौसम में बदलाव, जमीन की घटती उर्वरता और फसलों में बढ़ती बीमारियों ने उनकी पैदावार को प्रभावित किया। इसके अलावा, एनपीके जैसे रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने लागत को इतना बढ़ा दिया कि खेती घाटे का सौदा बनने लगी।
इन समस्याओं से परेशान होकर विनोद ने खेती में बदलाव का निर्णय लिया। उन्होंने सेंद्रिय खेती की ओर कदम बढ़ाया, जिसमें प्राकृतिक खाद, गोबर, कंपोस्ट और जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। यह फैसला उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
सेंद्रिय खेती अपनाने के बाद उनकी हल्दी की पैदावार में चौंकाने वाली वृद्धि हुई। जहां पहले उन्हें प्रति एकड़ 20 से 25 क्विंटल हल्दी मिलती थी, वहीं अब उत्पादन बढ़कर 40 से 45 क्विंटल हो गया। एक बार तो उन्होंने 52 क्विंटल प्रति एकड़ का रिकॉर्ड उत्पादन भी हासिल किया।
पिछले सीजन में विनोद ने करीब 1.5 एकड़ जमीन से 3 टन ऑर्गेनिक हल्दी पाउडर तैयार किया, जिसे उन्होंने 750 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा। इससे उनकी कुल आमदनी 21 लाख रुपये तक पहुंच गई। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। यानी प्रति एकड़ करीब 6.5 लाख रुपये की कमाई।
विनोद तोडकर की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका खुद का तैयार किया हुआ जैविक फॉर्मूला है। वह किसानों को सलाह देते हैं कि वे एनपीके अझोटोबैक्टर जैसे जैविक खाद को केवल एक बार खरीदें और फिर इसे दही की तरह अपने खेत में बढ़ाते रहें। इससे लागत काफी कम हो जाती है और बाजार पर निर्भरता भी घटती है।
इस फॉर्मूले को तैयार करने के लिए 1 लीटर अझोटोबैक्टर में 200 लीटर पानी मिलाया जाता है। इसमें गुड़, शक्कर, उड़द दाल, अंकुरित अनाज और अंडे का पाउडर मिलाकर 4-5 दिन तक तैयार किया जाता है। इसके बाद हल्दी के पूरे 9 महीने के चक्र में इसे 10 से 12 बार इस्तेमाल किया जाता है।
खेती की तैयारी में भी विनोद पूरी तरह प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करते हैं। वे जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए मुर्गी खाद, जीवामृत और वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करते हैं। हल्दी की बुवाई सरी-बारी पद्धति से की जाती है, जिससे पानी का सही प्रबंधन होता है और फसल सड़ने से बचती है। साथ ही, ठिबक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) के जरिए पानी और पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचाए जाते हैं।
हल्दी की फसल लंबी अवधि की होती है, इसलिए विनोद बीच में कोथिंबीर (धनिया) का आंतरपीक भी लेते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय मिलती है और जमीन का बेहतर उपयोग होता है।
आज विनोद तोडकर न सिर्फ खुद सफल किसान बने हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं। वे अपने अनुभव और तकनीक को दूसरे किसानों के साथ साझा कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग सेंद्रिय खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
Organic Farming Success: सांगली के किसान ने हल्दी की खेती से लिखी सफलता की नई कहानी, 1.5 एकड़ में कमाए 21 लाख

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