मुंबई।
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर चल रहा मतभेद अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी में संगठनात्मक बदलाव को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर राजनीतिक रूप ले लिया है, खासकर सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले गुट में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी संविधान में प्रस्तावित संशोधन—जिसमें कार्याध्यक्ष को अधिक अधिकार देने की बात कही गई है—ने नेतृत्व के भीतर नई खाई पैदा कर दी है। इस प्रस्ताव को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद इतने बढ़ गए हैं कि अब इसे पार्टी में संभावित टूट की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
28 जनवरी के बाद के फैसलों पर सवाल
विवाद उस समय और गहरा गया जब सुनेत्रा पवार ने 28 जनवरी के बाद जारी किसी भी आधिकारिक पत्राचार को अमान्य मानने की अपील की। इस बयान को पार्टी के भीतर सीधी चुनौती के तौर पर लिया गया। कई नेताओं ने इसे संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ कदम बताया।
इस स्थिति को संभालने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात कर विवाद सुलझाने की कोशिश की। हालांकि, बैठक के बाद भी कोई ठोस समाधान निकलता नजर नहीं आया।
पार्थ पवार भी नाराज, विवाद और गहराया
मामला तब और उलझ गया जब पार्थ पवार समेत कई नेताओं ने दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया। खासकर चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र को लेकर असहमति अब खुलकर सामने आ चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा अब पार्टी के भीतर दो स्पष्ट धड़ों के बीच टकराव का मुख्य कारण बन गया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं, जिससे सुलह की राह मुश्किल होती जा रही है।
दिग्गजों की सक्रियता, लेकिन समाधान दूर
विवाद को थामने के लिए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता लगातार बैठकों में जुटे हैं। अंदरखाने सुलह के प्रयास तेज कर दिए गए हैं, लेकिन अब तक कोई निर्णायक हल सामने नहीं आया है। राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावों से पहले पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पार्टी की संगठनात्मक एकता और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बन रही है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।



