जो इंडिया / मुंबई: (Mumbai water crisis)
देश की आर्थिक राजधानी Mumbai इस समय गंभीर जल संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। भीषण गर्मी, गिरता जलस्तर और मानसून में संभावित देरी ने शहर की चिंता बढ़ा दी है। महानगरपालिका द्वारा लागू की गई 10 से 15 प्रतिशत पानी कटौती ने आम मुंबईकरों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दूसरी तरफ इस संकट का सबसे बड़ा फायदा कथित “टैंकर माफिया” उठा रहे हैं, जिन्होंने पानी के दामों में मनमानी बढ़ोतरी कर दी है।
मुंबई को पानी सप्लाई करने वाली प्रमुख झीलों और बांधों — तंसा, भातसा, अपर वैतरणा, मोडक सागर, तुलसी और विहार — में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है। मनपा अधिकारियों के अनुसार वर्तमान जल भंडार कुल क्षमता के लगभग 23 प्रतिशत के आसपास रह गया है। गर्मी के कारण वाष्पीकरण की रफ्तार बढ़ने और मौसम विभाग द्वारा सामान्य से कम बारिश की आशंका जताए जाने के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर पानी कटौती लागू की है।
हालांकि कागजों पर यह कटौती 10 से 15 प्रतिशत बताई जा रही है, लेकिन शहर के कई इलाकों में लोगों को इसका असर कहीं अधिक झेलना पड़ रहा है। कई उपनगरों में सुबह-शाम पानी की सप्लाई का समय घटा दिया गया है, जबकि कुछ जगहों पर लोगों को केवल कुछ घंटों के लिए ही पानी मिल पा रहा है। ऊंची इमारतों और बड़ी हाउसिंग सोसायटियों में स्थिति और गंभीर बनती जा रही है।
जल संकट के बीच निजी पानी टैंकरों की मांग अचानक बढ़ गई है। इसका फायदा उठाते हुए टैंकर ऑपरेटरों ने दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। जो टैंकर कुछ सप्ताह पहले तक ₹1,500 से ₹2,000 में उपलब्ध था, वही अब ₹3,500 से ₹4,000 तक बेचा जा रहा है। कई इलाकों में लोगों का आरोप है कि रात के समय टैंकरों की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है ताकि ऊंचे दाम वसूले जा सकें।
बड़ी हाउसिंग सोसायटियों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। कई सोसायटियों को हर महीने पानी खरीदने पर अतिरिक्त ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसका असर सीधे मेंटेनेंस चार्ज पर पड़ रहा है और अब इसका बोझ आम नागरिकों की जेब पर बढ़ने लगा है।
सूत्रों का दावा है कि शहर में सक्रिय टैंकर नेटवर्क अवैध बोरवेल, निजी कुओं और मनपा पाइपलाइनों में होने वाले लीकेज का फायदा उठाकर पानी की चोरी कर रहा है। बाद में यही पानी ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने इस पूरे नेटवर्क की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर सख्ती नहीं होने के कारण यह कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।
इस बीच मनपा ने नागरिकों से पानी बचाने की अपील की है। लोगों से कार धोने, पाइप से सफाई करने और अत्यधिक पानी उपयोग से बचने को कहा गया है। प्रशासन ने शॉवर की जगह बाल्टी से स्नान करने और रिसाव वाले नलों को तुरंत ठीक कराने की सलाह भी दी है।
सूत्रों के अनुसार यदि अगले कुछ हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन भातसा और अपर वैतरणा बांधों के रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकल्प केवल अस्थायी राहत दे सकता है।
मुंबई में हर साल गर्मी के मौसम में जल संकट की स्थिति बनती है, लेकिन इस बार बढ़ती आबादी, अनियोजित विकास और मानसून की अनिश्चितता ने हालात को ज्यादा चिंताजनक बना दिया है। अब पूरे शहर की निगाहें मानसून की पहली तेज बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि वही इस संकट से राहत दिलाने की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने है।
Mumbai water crisis: मुंबई प्यास की कगार पर: पानी कटौती से बढ़ी आफत, टैंकर माफिया ने दोगुने किए दाम

Advertisement
Leave a Comment


