जोइंडिया/मुंबई: भारत की सबसे महत्वाकांक्षी परिवहन परियोजनाओं में शामिल मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना
ताजा जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 तक इस मेगा प्रोजेक्ट का लगभग 55–56 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है, जबकि अब तक इस पर 85,801 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है। हालांकि, तय समयसीमा की तुलना में प्रगति धीमी रहने से यात्रियों की उम्मीदों पर फिलहाल ब्रेक लगा हुआ है।
प्रदूषण नियमों के कारण रुका काम
हाल ही में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) इलाके में प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन को लेकर बुलेट ट्रेन परियोजना का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। इस दौरान निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल और वायु प्रदूषण को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद बीएमसी (BMC) ने हस्तक्षेप किया।
हालांकि, वायु प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी उपाय अपनाए जाने के बाद बीएमसी ने दोबारा काम शुरू करने की अनुमति दे दी है, जिससे परियोजना को एक बार फिर गति मिलने की उम्मीद है।
2027 से शुरू होगा पहला चरण
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, बुलेट ट्रेन का पहला चरण वर्ष 2027 तक शुरू किए जाने की योजना है, जबकि पूरा कॉरिडोर 2029 तक चालू होने की संभावना जताई जा रही है। शुरुआती चरण में सूरत और बिलिमोरा के बीच का हिस्सा सबसे पहले यात्रियों के लिए खोला जाएगा।
बताया जा रहा है कि 15 अगस्त 2027 से बुलेट ट्रेन के परिचालन की आधिकारिक शुरुआत करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो उस दिन देश को आधुनिक हाई-स्पीड रेल सेवा की सौगात मिल सकती है।
चुनौतियां बनीं बड़ी रुकावट
हालांकि परियोजना आगे बढ़ रही है, लेकिन भूमि अधिग्रहण, तकनीकी जटिलताओं, निर्माण संबंधी दिक्कतों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के कारण इसमें बार-बार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इन सभी कारणों से समयसीमा प्रभावित हुई है और यात्रियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
उम्मीद बरकरार
कुल मिलाकर, मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत के परिवहन इतिहास में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भले ही इसमें देरी और बाधाएं सामने आई हों, लेकिन काम दोबारा शुरू होने और समयसीमा की घोषणा से यह साफ है कि परियोजना को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियां प्रतिबद्ध हैं। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में यह सपना कितनी तेजी से हकीकत की पटरी पर दौड़ता है।
