जो इंडिया / मुंबई: (CM Relief Fund Scam)
राज्य में किसानों की समस्याओं और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावितों की मदद को लेकर महायुति सरकार एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मुख्यमंत्री राहत कोष में एक अरब रुपये से अधिक जमा होने के बावजूद किसानों को केवल 75 हजार रुपये की सहायता देने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता वैभव कोकाटे द्वारा प्राप्त जानकारी के बाद हुआ। जैसे ही शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधान परिषद के पूर्व विपक्ष नेता अंबादास दानवे ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया, मामला तूल पकड़ गया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा सीएमओ को सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा।
आरटीआई में क्या मिला?
आरटीआई के जवाब के अनुसार:
अक्टूबर महीने में मुख्यमंत्री सहायता निधि में कुल 1 अरब रुपये जमा हुए।
लेकिन अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को सिर्फ 75,000 रुपये की सहायता दी गई।
आरटीआई की यही जानकारी विवाद का केंद्र बन गई।
दानवे का तीखा प्रहार
शिवसेना नेता दानवे ने सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा—
> “देवेंद्र फडणवीस इस उदार राज्य के कंजूस प्रमुख साबित हुए हैं। लोगों ने अतिवृष्टि प्रभावित किसानों की मदद के लिए करोड़ों रुपये दान में दिए, लेकिन किसानों तक सिर्फ 75 हजार रुपये पहुंचे। क्या इसे सरकार अपने उद्योगपति दोस्तों का चुनाव फंड समझ रही है?” उनके इस बयान के बाद पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय की सफाई
दानवे के आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने कहा कि:
दानवे द्वारा साझा की गई जानकारी गलत और अधूरी है।
केवल एक महीने के डेटा को आधार बनाकर गलतफहमी पैदा की गई है।
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि आरटीआई में दिए गए कुछ आंकड़े तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
इसके साथ ही कार्यालय ने यह भी कहा कि—
> “गलत जानकारी जारी करने वाले अधिकारी की जांच कराई जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”
विधानमंडल में भारी हंगामा, विपक्ष का सभात्याग
इस खुलासे का असर सीधे विधानमंडल में देखने को मिला।
विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार किसानों की सहायता छोड़कर राजनीति और छवि सुधार में व्यस्त है।
लगातार आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल इतना गर्म हुआ कि जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सभात्याग कर दिया।
पूरा मामला अभी जांच के दायरे में
जहां विपक्ष इसे किसानों के साथ अन्याय बता रहा है, वहीं सरकार इसे गलत और भ्रामक प्रस्तुति कह रही है।
मामला अब जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में राहत कोष की वास्तविक स्थिति और वितरण से जुड़ी और जानकारियाँ सामने आने की उम्मीद है।
