वसई–विरार म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VVMC) (Vasai Virar Municipal Corporation) चुनाव में बहुजन विकास अघाड़ी (BVA) की शानदार जीत (BVA Victory) के पीछे अगर किसी चेहरे की सबसे ज़्यादा चर्चा है, तो वह हैं कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर। शुक्रवार का दिन न सिर्फ BVA प्रमुख हितेंद्र ठाकुर (Hitendra Thakur) के लिए खास रहा, बल्कि वार्ड नंबर 27 से ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले कन्हैया भोईर के लिए भी यह दिन राजनीतिक पहचान पुख्ता करने वाला साबित हुआ।
विधानसभा चुनाव में बाविया इलाके से तीन विधायकों की हार के बाद यह माना जा रहा था कि ठाकुर परिवार की पकड़ कमजोर हुई है और इस बार नगर निगम हाथ से निकल सकता है। लेकिन VVMC चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि ज़मीनी राजनीति में अब भी बहुजन विकास अघाड़ी का दबदबा कायम है। इस पूरे चुनावी समर में कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर एक ऐसे नेता के तौर पर उभरे, जिन्होंने न सिर्फ अपने वार्ड में मजबूत पकड़ दिखाई, बल्कि संगठन की रणनीति को भी जमीन पर उतारकर दिखाया।
वार्ड नंबर 27: कन्हैया भोईर की निर्णायक जीत
वार्ड नंबर 27 में BVA ने जोरदार जीत दर्ज की और इस जीत के केंद्र में रहे कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर (Kanhaiya (Beta) Manohar Bhoir)। स्थानीय मुद्दों को लेकर लगातार जनसंपर्क, घर-घर पहुंचने वाली कैंपेनिंग और युवाओं से सीधा संवाद—इन सभी ने कन्हैया भोईर को जनता का भरोसेमंद चेहरा बना दिया।
उनके साथ वार्ड से
- सुनील मोरेश्वर अचोलकर,
- ज्योत्सना शरद भागली,
- दीपा सुजेश पाटिल
ने भी भारी मतों से जीत दर्ज की, लेकिन कन्हैया भोईर की जीत को सबसे अहम इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसे “युवा नेतृत्व पर जनता की मुहर” के तौर पर देखा जा रहा है। इस जीत ने यह संदेश दिया कि वसई–विरार की राजनीति में अब नया नेतृत्व भी पूरी मजबूती से खड़ा है।
जीत के बाद सड़कों पर जश्न
VVMC चुनाव में जीत के ऐलान के बाद कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर के समर्थकों और BVA कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार जश्न मनाया। जीत रैली में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए, ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ पूरे इलाके में उत्साह का माहौल देखने को मिला। यह जश्न सिर्फ एक वार्ड की जीत नहीं, बल्कि बहुजन विकास अघाड़ी की सत्ता पर दोबारा मुहर का प्रतीक बन गया।
VVMC में BVA की सत्ता फिर पक्की
115 सीटों वाली वसई–विरार नगर निगम में बहुजन विकास अघाड़ी ने 71 सीटें जीतकर/लीडिंग कर साफ बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के साथ यह लगभग तय हो गया है कि इस साल भी वसई–विरार नगर निगम का मेयर हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास अघाड़ी से ही होगा।
विपक्ष हुआ बेहाल
चुनावी नतीजों ने विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीजेपी को इस चुनाव में सिर्फ 43 सीटों से संतोष करना पड़ा।
शिंदे गुट की शिवसेना महज एक सीट पर बढ़त बना पाई।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) एक भी सीट पर प्रभाव नहीं छोड़ पाई।
कांग्रेस, एनसीपी (दोनों गुट) और अन्य पार्टियां पूरी तरह हाशिए पर चली गईं।
कन्हैया भोईर: भविष्य का बड़ा चेहरा?
इस पूरे चुनावी परिदृश्य में कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर सिर्फ एक विजयी उम्मीदवार नहीं, बल्कि BVA के उभरते चेहरे के तौर पर सामने आए हैं। उनकी जीत यह संकेत देती है कि बहुजन विकास अघाड़ी अब अनुभव के साथ-साथ युवा नेतृत्व को भी आगे बढ़ा रही है।
कुल मिलाकर, वसई–विरार के इस चुनाव में जहां हितेंद्र ठाकुर ने सत्ता पर अपनी पकड़ दोबारा साबित की, वहीं कन्हैया (बेटा) मनोहर भोईर इस जीत की सबसे मजबूत और चमकती कड़ी बनकर उभरे हैं।

