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Budget session of maharashtra assembl 2025: हथकड़ी पहनकर विधानसभा पहुंचे जितेंद्र आव्हाड, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अमेरिका में भारतीयों पर अन्याय का उठाया मुद्दा

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जो इंडिया / मुंबई

महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र (Budget session of maharashtra assembly) आज से शुरू हो गया। सुबह 10 बजे से विधायक विधान भवन पहुंचने लगे, लेकिन 10:30 बजे जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड विधानसभा में प्रवेश कर रहे थे, तो उनके हाथों में हथकड़ी थी। उन्होंने दोनों हाथों में हथकड़ी डालकर उन्हें ऊपर उठाया और विधानसभा परिसर में पहुंचे। उनके इस रूप ने सभी को हैरान कर दिया।

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क्या कहा जितेंद्र आव्हाड ने?

पत्रकारों से बातचीत में जितेंद्र आव्हाड ने बताया कि यह कदम उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों के विरोध में उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अपनी राय रखने वालों और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर उनकी आवाज दबाई जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

> “बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारा मूलभूत अधिकार है। इस अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए मैंने यह प्रतीकात्मक हथकड़ी पहनी है।” – जितेंद्र आव्हाड

 

अमेरिका में भारतीयों पर अन्याय का मुद्दा भी उठाया

आव्हाड ने अमेरिका में भारतीयों को वीजा न मिलने और उन्हें जबरन देश भेजे जाने के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार की नीतियों के कारण कई भारतीय परिवार बिखर रहे हैं।

> “भारतीयों को जबरन वापस भेजा जा रहा है, उनके पैरों में बेड़ियां और हाथों में हथकड़ियां डाली जा रही हैं। टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। यह हिंदुस्थान के लिए शर्मनाक है।” – जितेंद्र आव्हाड

उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहने वाले महाराष्ट्र के लोगों के बड़े सपने अब टूटने लगे हैं।

“अगर हम चुप रहे, तो अमेरिका हमें निगल जाएगा”

आव्हाड ने चेतावनी दी कि यदि इस अन्याय के खिलाफ अब आवाज नहीं उठाई गई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

> “अगर हम हथकड़ियों की वजह से चुप रहे, तो अमेरिका हमें निगल जाएगा। अमेरिका हमारा बाप नहीं है, हमें अन्याय के खिलाफ बोलना सीखना होगा।” – जितेंद्र आव्हाड

 

क्या असर होगा आव्हाड के इस विरोध का?

जितेंद्र आव्हाड का यह विरोध प्रदर्शन कितना असरदार रहेगा, यह देखने वाली बात होगी। हालांकि, उनके इस कदम से यह मुद्दा सुर्खियों में जरूर आ गया है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार के खिलाफ एक मजबूत संदेश बताया, जबकि सत्ताधारी दलों ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया।

अब देखना होगा कि महाराष्ट्र विधानसभा में इस मुद्दे पर क्या बहस होती है और क्या सरकार इस पर कोई कदम उठाती है या नहीं।

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