जो इंडिया / मुंबई: (Impact of Middle East Tensions)
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारत के आम नागरिकों की जेब पर पड़ने लगा है। पहले जहां घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से होटल और रेस्टोरेंट्स में खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं, वहीं अब हवाई सफर भी तेजी से महंगा होता जा रहा है। एयरलाइंस कंपनियों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे यात्रियों की चिंता और बढ़ गई है।
दरअसल, सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अप्रैल महीने के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की नई कीमतों का ऐलान किया गया है। इस बार ATF की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय एविएशन सेक्टर के इतिहास में पहली बार जेट फ्यूल की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई है। इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए इसमें करीब 115 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि घरेलू उड़ानों के लिए सरकार ने इस वृद्धि को 25 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रयास किया है।
हालांकि, इसका असर टिकट की कीमतों में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। कई प्रमुख रूट्स पर किराए में 25 से लेकर 200 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे खासकर गर्मी की छुट्टियों में यात्रा करने की योजना बना रहे लोगों को बड़ा झटका लगा है।
मुंबई-दिल्ली जैसे व्यस्त रूट पर एयरलाइंस कंपनियों ने किराए में उल्लेखनीय वृद्धि की है। एयर इंडिया ने अपना किराया 5,800 रुपये से बढ़ाकर 7,800 रुपये कर दिया है, जो करीब 34 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं इंडिगो ने 44 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ किराया 7,500 रुपये कर दिया है। स्पाइसजेट ने तो इसमें सबसे ज्यादा उछाल दिखाते हुए करीब 80 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ किराया 9,000 रुपये तक पहुंचा दिया है।
मुंबई-बेंगलुरु रूट पर भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट के किराए क्रमशः 5,772 रुपये, 5,515 रुपये और 5,706 रुपये तक पहुंच गए हैं। वहीं दिल्ली-पुणे रूट पर स्पाइसजेट ने सबसे अधिक 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए किराया 7,119 रुपये कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में इस तरह की तेज वृद्धि का सीधा असर एविएशन इंडस्ट्री पर पड़ता है, क्योंकि एयरलाइंस की कुल लागत में ATF का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत तक होता है। ऐसे में कंपनियां घाटे से बचने के लिए किराए बढ़ाने को मजबूर होती हैं।
इस बढ़ती महंगाई का असर केवल यात्रियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म में कमी आने की आशंका जताई जा रही है, जिससे होटल, ट्रैवल एजेंसियों और अन्य संबंधित व्यवसायों पर भी दबाव बढ़ेगा।
Impact of Middle East Tensions: आसमान छूने लगे हवाई किराए, यात्रियों की बढ़ी चिंता

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