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Film review: ‘द ताज स्टोरी’ में इतिहास और आस्था की टक्कर — परेश रावल की अदाकारी और तुषार गोयल का साहसी निर्देशन बना चर्चा का केंद्र

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31 अक्टूबर को रिलीज़ हुई फिल्म ने मचाई सनसनी — कोर्टरूम में उठे सवालों से सिनेमा हॉल तक गूंज उठी बहस

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जो इंडिया / मुंबई: (film review)

ताजमहल — जिसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है, वही अब एक नई बहस का विषय बन गया है। लेखक-निर्देशक तुषार अमरीश गोयल की नई फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ ने रिलीज़ होते ही सिनेमा प्रेमियों और इतिहासकारों के बीच हलचल मचा दी है। विश्व के सात अजूबों में शामिल ताजमहल की असली कहानी पर सवाल उठाती यह फिल्म एक साहसी प्रयोग के रूप में सामने आई है।

फिल्म के ट्रेलर ने पहले ही विवादों को जन्म दे दिया था, लेकिन 31 अक्टूबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होते ही ‘द ताज स्टोरी’ ने दर्शकों को झकझोर दिया। कहानी का केंद्र ताजमहल के 22 सीलबंद कमरों का रहस्य है, जिसे निर्देशक ने कोर्टरूम ड्रामा के रूप में प्रस्तुत किया है। फिल्म का हर दृश्य दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ताजमहल केवल एक स्मारक है, या उसके पीछे कोई दबी हुई सच्चाई भी है?

कोर्टरूम में सच और आस्था की जंग

फिल्म में परेश रावल एक टूरिस्ट गाइड का किरदार निभा रहे हैं, जो ताजमहल की उत्पत्ति पर सवाल उठाते हैं और न्यायालय से सच्चाई उजागर करने की गुहार लगाते हैं। अदालत के भीतर तर्क, इतिहास और आस्था के बीच टकराव फिल्म को और रोचक बनाता है। कोर्ट की हर बहस, हर गवाही और हर संवाद दर्शकों को अपनी सीट से जोड़े रखता है।

परेश रावल की दमदार परफॉर्मेंस

परेश रावल ने अपने अनुभव और गहराई से किरदार में जान फूंक दी है। उनकी आंखों की भाषा, संवाद की धार और भावनाओं का संयम इस फिल्म को ऊंचाई पर ले जाता है। आलोचकों का मानना है कि यह भूमिका उन्हें इस साल के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की रेस में मजबूती से खड़ा करती है।

सहायक कलाकारों का सशक्त प्रदर्शन

फिल्म में ज़ाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास, स्नेहा वाघ, शिशिर शर्मा, अखिलेन्द्र मिश्र और बृजेन्द्र काला जैसे कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति को प्रभावशाली बनाया है। हर किरदार फिल्म के विषय को गहराई देता है और कोर्टरूम के माहौल को जीवंत रखता है।

तुषार गोयल का साहसिक निर्देशन

निर्देशक तुषार अमरीश गोयल ने एक विवादित विषय को संतुलित दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। उन्होंने तर्क और भावना दोनों के बीच संतुलन बनाए रखा है। न तो फिल्म धार्मिक दृष्टि से उकसाने वाली लगती है, न ही इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है। बल्कि यह सवालों के ज़रिए सोचने पर मजबूर करती है।

सिनेमैटोग्राफी और तकनीकी पक्ष

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी बेहतरीन है। ताजमहल की रहस्यमयी सुंदरता को कैमरे ने शानदार ढंग से कैद किया है। प्रोडक्शन डिज़ाइन, लाइटिंग और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को भव्यता प्रदान करते हैं। कोर्टरूम के तनाव और ताज की शांति — दोनों का संगम दृश्य रूप से प्रभावित करता है।

फिल्म समीक्षा 

कलाकार: परेश रावल, जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास, स्नेहा वाघ, शिशिर शर्मा, अखिलेंद्र मिश्रा, बृजेन्द्र काला

निर्देशक: तुषार अमरीश गोयल

निर्माता: सीए सुरेश झा

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (3.5 स्टार)

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