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BMC Election 2026: शिंदे गुट की सख्त शर्त पर भाजपा का पलटवार, कहा- ‘बड़ा भाई मैं, तू कौन बे?’

BJP vs Eknath Shinde

जोइंडिया टीम/ मुंबई: मुंबई समेत राज्य की अधिकांश महानगरपालिकाओं में भाजपा और शिंदे गुट (BJP vs Eknath Shinde)

के बीच खुली जंग का माहौल बन गया है। जिस महायुति को पहले स्थिर और मजबूत गठबंधन के रूप में पेश किया जा रहा था, उसमें अब अविश्वास और दरारें साफ दिखने लगी हैं। सीटों के बंटवारे और सत्ता के हिस्से को लेकर जारी खींचतान ने महायुति की औपचारिक घोषणा फिलहाल अधर में लटका दी है।

शिंदे गुट की सख्त शर्त

मुंबई महानगरपालिका चुनाव में शिंदे गुट ने भाजपा के सामने साफ और सख्त शर्त रख दी है। गुट की मांग है:

  • 125 सीटें
  • महापौर पद तीन वर्षों के लिए
  • स्थायी समिति की अध्यक्षता

शिंदे गुट (Eknath Shinde) का कहना है कि मुंबई में सत्ता साझेदारी बराबरी के बिना स्वीकार नहीं की जाएगी।

भाजपा का पलटवार: “हम ही बड़ा भाई हैं”

शिंदे गुट की मांग पर भाजपा ने भी बिना लाग-लपेट के अपना रुख स्पष्ट किया है। भाजपा का कहना है कि मुंबई, नवी मुंबई, कल्याण–डोंबिवली, मीरा–भाईंदर और वसई–विरार जैसी महानगरपालिकाओं में भाजपा ही निर्विवाद नेता है। भाजपा नेताओं के अनुसार शिंदे गुट का जनाधार कमजोर है और वह भाजपा के कंधे पर बैठकर चुनाव लड़ना चाहता है।

भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि शिंदे गुट को अधिकतम 70 सीटें ही दी जा सकती हैं। इससे ज्यादा सीट देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

मुंबई में आमने-सामने

227 वार्डों वाले मुंबई महानगरपालिका चुनाव में शिंदे गुट जहां 125 सीटों पर अड़ा है, वहीं भाजपा ने 150 सीटों पर दावा ठोक दिया है। यह टकराव अब केवल संख्या का नहीं बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।

महायुति में दरारें और सत्ता की भूख

जिस महायुति को स्थिर सरकार का मॉडल बताया जा रहा था, उसी गठबंधन में सत्ता की भूख और टकराहट अब बेनकाब हो गई है। भाजपा खुद को निर्विवाद नेता मान रही है, जबकि शिंदे गुट बराबरी के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं।

अब सवाल यह है:

  1. क्या शिंदे गुट अपनी शर्तों पर अड़ा रहेगा?
  2. या भाजपा के “बड़ा भाई” वाले दावे के आगे झुक जाएगा?
  3. या मुंबई महापालिका चुनाव से पहले ही महायुति का नकाब पूरी तरह उतर जाएगा?

राज्य की नजरें अब मुंबई की सत्ता की इस जंग पर टिकी हैं।

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