जो इंडिया / मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। विधानमंडल के मानसून सत्र (Monsoon Session of the Legislature
मुंबई स्थित विपक्ष के नेता अंबादास दानवे के सरकारी निवास पर महाविकास अघाड़ी की बैठक के बाद आयोजित पत्रकार परिषद में आदित्य ठाकरे ने सरकार की नीतियों, कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के मामलों पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महायुति सरकार का चायपान कार्यक्रम एक दिखावा मात्र है, जिसे विपक्ष पूरी तरह बहिष्कृत करेगा।
भ्रष्टाचारियों की सरकार, खोखले वादे
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि यह सरकार सिर्फ आश्वासन देने में माहिर है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम करने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा, “यह महायुति नहीं बल्कि महाझूठी सरकार है। इस सरकार के तीन चेहरे हैं – भाजपा और दो गद्दार गुट – जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति को कलंकित कर दिया है।”
उन्होंने दावा किया कि सरकार के भीतर घमासान मचा हुआ है, मंत्री आपस में ही एक-दूसरे पर फंड चोरी के आरोप लगा रहे हैं। कई मंत्री खुले मंच पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं, जिससे यह साबित होता है कि सरकार में समन्वय की भारी कमी है।
दादा भुसे पर गंभीर आरोप
आदित्य ठाकरे ने शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बड़ी गड़बड़ी का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए जो पहली मेरिट लिस्ट जारी की गई है, उसमें कॉलेजों के आवंटन में बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस घोटाले के पीछे दादा भुसे हैं? उन्होंने याद दिलाया कि यही मंत्री पहले छात्रों पर हिंदी थोपने की कोशिश कर चुके हैं।
चायपान पर नहीं जाएंगे विपक्षी नेता
उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बार सरकार के चायपान कार्यक्रम का बहिष्कार करेगा। “हम ऐसे लोगों के साथ चाय नहीं पी सकते जिन्होंने जनता के साथ धोखा किया है। यह नैतिक रूप से भी गलत होगा,” उन्होंने कहा।
मानसून सत्र में हंगामे के आसार
इस बयानबाजी से यह स्पष्ट हो गया है कि महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र विवादों और विरोध प्रदर्शनों से भरा रहेगा। विपक्ष ने सरकार को सभी मोर्चों पर घेरने की रणनीति बना ली है।
