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Aravalli Hills Controversy: आदित्य ठाकरे बने ‘अरावली बचाओ’ अभियान का हिस्सा, माइनिंग के खिलाफ सरकार पर साधा निशाना

Aaditya Thackeray Aravalli Mining

Aravalli Hills Controversy: अरावली पर्वतमाला (Aravalli Hills) की सुरक्षा को लेकर देशभर में उठता आक्रोश अब राजनीतिक और सामाजिक चेतना का बड़ा मुद्दा बन चुका है। देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला को माइनिंग के नाम पर खत्म करने के कथित प्रस्ताव ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी कड़ी में शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray)

ने केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है।

आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) ने सोशल मीडिया पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि देश के पर्यावरण मंत्री अरावली जैसी संवेदनशील और ऐतिहासिक पर्वत श्रृंखला को खत्म करने के प्रस्ताव का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब यह मामला सामने आया, तो सबसे पहले इस पर झूठ क्यों बोला गया? अगर यह अरावली पहाड़ियों का एक छोटा हिस्सा भी है, तो उसे माइनिंग के लिए खोलने की ज़रूरत आखिर क्यों पड़ी?

उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार देश की इकोलॉजी के हर हिस्से को खत्म करने पर आमादा है। जिस तरह सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया जा रहा है, उसी तरह अब प्राकृतिक संसाधनों पर भी हमला किया जा रहा है। आदित्य ठाकरे ने चेतावनी दी कि आज अगर अरावली को माइनिंग के हवाले किया गया, तो कल पश्चिमी घाट और फिर हिमालय भी इसी राह पर धकेल दिए जाएंगे।

आदित्य ठाकरे ने कहा कि अरावली पर्वतमाला न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी है, बल्कि यह उत्तर भारत में रेगिस्तान के फैलाव को रोकने, जलस्तर बनाए रखने और जैव-विविधता की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है। इसके बावजूद सरकार की नीतियां विकास के नाम पर विनाश को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना प्रेरणादायक है कि राजस्थान के लोग एकजुट होकर अरावली को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। जनता का यह संघर्ष बताता है कि देश की प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी अब सरकार से ज्यादा नागरिकों के कंधों पर आ गई है।

आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह तात्कालिक मुनाफे और कॉरपोरेट हितों के बजाय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचे। सरकार को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार से ऐसी संवेदनशीलता की उम्मीद करना मुश्किल है—ऐसा तंज भी उन्होंने कसा।

आखिरी में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अरावली को बचाने की यह लड़ाई सिर्फ एक पहाड़ी श्रृंखला की नहीं, बल्कि भारत की पर्यावरणीय आत्मा को बचाने की लड़ाई है। #AravaliBachao

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