जो इंडिया / मुंबई: (Temple land protection)
महाराष्ट्र में मंदिर भूमियों पर बढ़ते अवैध कब्ज़ों के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान तेज हो गया है। मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर सहित राज्य के 22 जिलों के 1,000 से अधिक मंदिर ट्रस्टियों ने सरकार से मांग की है कि गुजरात और कर्नाटक की तर्ज पर ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ को तत्काल लागू किया जाए।
राज्य के विभिन्न जिलों में ट्रस्टियों व धार्मिक संगठनों ने मिलकर 300 से अधिक ज्ञापन कलेक्टरों, तहसीलदारों, विधायकों और मंत्रियों को सौंपे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राज्यमंत्री योगेश कदम को भी इस संबंध में विस्तृत निवेदन भेजा गया है।
मंदिर भूमि पर अवैध कब्ज़े: ट्रस्टियों ने जताई गंभीर चिंता
मंदिरों की हजारों एकड़ भूमि पर भू–माफिया और कुछ राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कब्ज़ा किए जाने का आरोप लगाया गया है।
अभियान के प्रमुख बिंदु:
कोकण भवन बेलापुर, वसई तहसील कार्यालय, ठाणे जिल्हाधिकारी कार्यालय, श्रीवर्धन व पाली तहसीलदार कार्यालयों में निवेदन पत्र जमा किए गए।
रायगढ़ के हरिहरेश्वर, सातारा के सज्जनगड, पाली के बल्लाळेश्वर, नाशिक के मुक्तिधाम सहित कई प्रमुख मंदिरों के ट्रस्टी शामिल हुए।
अकोला जिले में 160 से अधिक अधिवक्ताओं ने अभियान में सहभाग दर्ज कराया।
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट ने बताया कि—
मंदिरों को मिली इनामी भूमि कानूनन ट्रांसफर नहीं की जा सकती, लेकिन भ्रष्टाचार एवं लापरवाही के कारण इसे गैरकानूनी रूप से बेचा जा रहा है।
पश्चिम महाराष्ट्र में 671 समूहों पर सीधा अतिक्रमण, जबकि विदर्भ में अमरावती-अकोला में 50 करोड़ की जमीन मात्र 960 रुपये में बेचने का गंभीर मामला सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश, फिर भी कानून का अभाव
सुप्रीम कोर्ट (2007) और मुंबई हाईकोर्ट (2025) ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है।
गुजरात में भूमि हड़पना गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 14 साल तक की सजा और बाजार मूल्य के बराबर जुर्माना का प्रावधान है।
महाराष्ट्र में ऐसे सख्त कानून की कमी का फायदा भू-माफिया उठा रहे हैं।
मुख्य मांगें: सरकार तुरंत अध्यादेश लाकर कानून बनाए
ट्रस्टियों और मंदिर महासंघ ने निम्न मांगें रखीं—
1. ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ को तुरंत अध्यादेश द्वारा लागू किया जाए।
2. पिछले 25 वर्षों के सभी भूमि हस्तांतरण की SIT जांच कराई जाए।
3. प्रत्येक विभाग में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित कर 6 महीनों में मामलों का निपटारा किया जाए।
4. दोषियों को कम से कम 14 साल की सजा और भारी आर्थिक दंड दिया जाए।
ट्रस्टियों का कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों के अनुरूप मंदिरों की पवित्र संपत्ति की रक्षा करना सरकार का नैतिक व संवैधानिक दायित्व है। इसलिए वे उम्मीद करते हैं कि राज्य सरकार शीघ्र ही ठोस कदम उठाएगी।



