नासिक के कुंभ मेले के लिए 1800 पेड़ काटने के फैसले ने शहर में गुस्से की आग भड़का दी है। नासिककर खुलकर सड़कों पर उतरकर इसका विरोध कर रहे हैं और प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसी बढ़ते आक्रोश के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे भी मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने कुंभ मेले के नाम पर की जा रही इस व्यापक पेड़ कटाई का कड़ा विरोध जताते हुए फडणवीस सरकार पर तीखी आलोचना की है।
राज ठाकरे ने फडणवीस सरकार को तीखे शब्दों में घेरते हुए कहा है कि नासिक में होने वाले कुंभ मेले की तैयारी के नाम पर 1800 पेड़ काटने की अनुमति देना सरकार की संवेदनहीन कार्यशैली का ताज़ा उदाहरण है। उन्होंने X पर लिखा कि यह पहली बार नहीं है जब नासिक में कुंभ आयोजित हो रहा है—लेकिन पहली बार सरकार “प्रगति” के नाम पर जंगल उजाड़ने पर उतारू है।
राज ठाकरे ने याद दिलाया कि एमएनएस नगर निगम प्रशासन के दौर में भी कुंभ मेला भव्य रूप से आयोजित हुआ था, लेकिन तब कम्युनिकेशन, प्लानिंग, ज़मीन की समझ और जनता की इच्छा—सब कुछ प्राथमिकता में था। मेयर और कमिश्नर को अमेरिका में सम्मान मिला था, क्योंकि बिना किसी पेड़ को काटे शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया था। यह साबित करता है कि समाधान हमेशा मौजूद होता है—बस नीयत होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार के “मुआवज़े में और पेड़ लगाएंगे” वाले बयान को भी कठघरे में खड़ा किया। ठाकरे ने कहा कि यह दावा पूरी तरह झूठा है, क्योंकि अब तक सरकार ने जितने लाखों पेड़ लगाने का दावा किया है, वे जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देते। और अगर सच में पांच गुना पेड़ लगाने की जमीन है, तो वहीं साधुग्राम बना दिया जाए—लेकिन ऐसा होगा नहीं। क्योंकि सरकार की वास्तविक मंशा अलग है—संतों के नाम पर जमीन समतल करो, और बाद में उसी जमीन को अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को सौंप दो।
राज ठाकरे ने कहा, “आज पेड़ काटने का बहाना कुंभ है, कल कोई और बहाना होगा। असल खेल जमीन हड़पने का है, दलाली का है—और इसमें मंत्री, विधायक, उनके रिश्तेदार, और पूरा गिरोह शामिल है।” उन्होंने यह भी कहा कि नासिक की जनता इस पेड़ कटाई के खिलाफ एकजुट है, और एमएनएस उनके साथ मजबूती से खड़ी है—चुनाव बाद भी।
उन्होंने जनता से अपील की कि वे पीछे न हटें, क्योंकि यह सिर्फ पेड़ों की लड़ाई नहीं, बल्कि शासन के अहंकार और जनता की इच्छाओं के बीच का संघर्ष है।
राज ठाकरे ने सरकार को चेतावनी दी— “अगर सरकार टकराव का रास्ता चुनती है, तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी पीछे हटने वाली नहीं है। हम जनता की हर लड़ाई में साथ खड़े रहेंगे—किसी भी कीमत पर!”



